बरवाडीह (लातेहार)। पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है. इसी कड़ी में छिपादोहर पूर्वी वन क्षेत्र में वनकर्मियों की टीम ने तड़के छापेमारी कर सखुवा की पांच बोटियां और दो साइकिलें जब्त की हैं. जब्त लकड़ी की अनुमानित कीमत करीब 25 हजार रुपये बताई जा रही है. हालांकि, वन विभाग की टीम को देखते ही लकड़ी तस्कर अपनी साइकिलें छोड़कर घने जंगल में भाग निकले. फरार तस्करों की पहचान नहीं हो सकी है. रेंजर अजय टोप्पो के निर्देश पर प्रभारी वनपाल शशांक पांडेय के नेतृत्व में वनकर्मियों की टीम ने वन संपदा की सुरक्षा को लेकर अमवाटीकर, नावाडीह और हेहेगाड़ा समेत संवेदनशील वन क्षेत्रों में रातभर सघन गश्त की. इसी दौरान मंगलवार की सुबह करीब पांच से छह बजे के बीच नावाडीह के पास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली. सूचना के आधार पर टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इलाके में छापेमारी की. वनकर्मियों की आहट मिलते ही तस्करों में अफरातफरी मच गई. वे लकड़ी और साइकिलें छोड़कर जंगल की ओर भाग गए. वहीं छापेमारी के बाद वन विभाग की टीम ने मौके से सखुवा की पांच बोटे और दो साइकिलें बरामद कर जब्त कर लीं. जब्त सामग्री को छिपादोहर पूर्वी वन क्षेत्र के रेंज कार्यालय लाया गया है. वन विभाग अब इस बात का पता लगाने में जुटा है कि लकड़ी कहां से काटी गई थी और इसे कहां ले जाने की तैयारी थी.
वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों पर होगी कार्रवाई
रेंजर अजय टोप्पो ने स्पष्ट किया कि जंगलों की सुरक्षा और वन संपदा को बचाना विभाग की प्राथमिकता है. इसके लिए संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त और निगरानी की जा रही है. उन्होंने कहा कि अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए छापेमारी अभियान आगे भी जारी रहेगा.
वन विभाग की कार्रवाई से तस्करों में हड़कंप
छिपादोहर पूर्वी वन क्षेत्र में वन विभाग की इस कार्रवाई से अवैध लकड़ी कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा है. विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि जंगलों में अवैध कटाई, लकड़ी की ढुलाई या तस्करी से संबंधित किसी भी गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल वन विभाग को सूचित करें. इससे वन संपदा की रक्षा करने और जंगलों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.