उन्होंने कहा कि इससे पहले भी पिछले वर्ष बीसी-10 कंपार्टमेंट में हाथियों के आपसी संघर्ष के दौरान एक हाथी की मौत हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में दतेल हाथियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई अक्सर जानलेवा रूप ले लेती है. घटना का पता टेनों रेंज में गश्ती के दौरान चला, जब वनकर्मियों को जंगल के भीतर से हाथियों के संघर्ष की तेज आवाज सुनाई दी. आवाज सुनते ही खोजबीन शुरू की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए रेंजर नन्द कुमार महतो ने तत्काल ट्रैकर और फॉरेस्ट गार्ड को इलाके में भेजा और सघन तलाशी अभियान चलाया गया. काफी प्रयास के बाद टीम को आसनपानी क्षेत्र में मृत हाथी मिला, जिसके बाद उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी गई. देर शाम होने के कारण शनिवार को पोस्टमार्टम नहीं हो सका. सुरक्षा और स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए वन विभाग की टीम और रेंज ऑफिसर रातभर जंगल में मुस्तैद रहे.
रविवार को मनिका से पशु चिकित्सा प्रभारी नरेश साहू, गारू से अश्विनी कुमार यादव तथा वन विभाग के अन्य चिकित्सकों सहित कुल छह डॉक्टरों की टीम गठित कर मौके पर ही पोस्टमार्टम किया गया. डॉक्टरों के अनुसार मृत हाथी के शरीर पर संघर्ष के कई गहरे निशान पाए गए हैं, जिससे यह पुष्टि हुई कि मौत हाथियों के आपसी संघर्ष का ही परिणाम है. घटना ने एक बार फिर पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और उनके बीच होने वाले संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है. वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी और गश्ती बढ़ाने की बात कही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर समय रहते नजर रखी जा सके.