लातेहार। शहर के बीचो-बीच स्थित अंबा कोठी में आयोजित श्री रामचरितमानस के 53वें अधिवेशन के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही. इस दौरान अयोध्याकांड के प्रसंगों का पाठ एवं व्याख्या की गई. कथा के क्रम में राजा दशरथ जी के देहावसान, भरत जी के आगमन तथा भगवान श्रीराम को अयोध्या वापस लाने के लिए भरत जी के चित्रकूट प्रस्थान से जुड़े प्रसंगों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया. इस अवसर पर मानस वाचस्पति अनिल जी भारद्वाज ने कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला ग्रंथ है. मानस के प्रत्येक प्रसंग में जीवन के लिए महत्वपूर्ण संदेश छिपा हुआ है. उन्होंने कहा कि अयोध्याकांड के प्रसंगों में त्याग, प्रेम, कर्तव्य, धर्म और मर्यादा का अद्भुत उदाहरण देखने को मिलता है. उन्होंने कहा कि भरत जी ने राजपाट मिलने के बावजूद उसे स्वीकार नहीं किया और भगवान श्रीराम को वापस अयोध्या लाने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान किया. भरत जी का त्याग और भगवान श्रीराम के प्रति उनका प्रेम हमें यह सीख देता है कि जीवन में पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण धर्म, कर्तव्य और रिश्तों की मर्यादा होती है. उन्होंने श्रद्धालुओं से मानस में वर्णित आदर्शों को केवल कथा के रूप में सुनने के बजाय अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया. मौके पर महायज्ञ समिति का मुख्य संरक्षक सह राज्य सांसद बैद्यनाथ राम, अध्यक्ष प्रमोद प्रसाद सिंह, महामंत्री सुदामा प्रसाद गुप्ता, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार महलका, डा विशाल शर्मा, सुनील कुमार शौंडिक, चंद्रप्रकाश उपाध्याय, मदन प्रसाद, सुरेश प्रसाद, दुर्गा प्रसाद, राजेश कुमार सिंह, संतोष कुमार अग्रवाल, दिनेश कुमार महलका, जया कुमारी और बरखा समेंत समिति कई लोग उपस्थित थे.