लातेहार। श्रीरामचरित मानस नवाह्न परायण पाठ महायज्ञ के 53 वें अधिवेशन के दौरान गिरिडीह से आये मानस वाचस्पति अनिल जी भारद्वाज ने कहा कि जिसको हनुमान जी का सहारा है. उसकी प्रतिज्ञा सदा पूरी होती है. यह वचन वैसे ही अटल है. जैसे पत्थर पर वज्र की लकीर की तरह अमिट है. उन्होने कहा कि हनुमान जी असम्भव को सम्भव और सम्भव को असम्भव कर सकते हैं. ऐसी महिमा औ विरुदावली किसी और की नहीं है. आनन्द की खान हनुमान जी का स्मरण करने मात्र से सारे संकट और शोक दूर हो जाते हैं. आगे कहा कि जिस पर हनुमान जी की कृपा होती है, उस पर माता पार्वती शिव लक्ष्मण, राम और जानकी भी अनुकूल रहते हैं. तुलसीदास ने कहा है कि कपिराज हनुमान् की कृपा भरी चितवन-दृष्टि कल्याण को खान है, सब प्रकार का मंगल करती है. श्री भारद्ववाज ने कहा कि श्रीमद् भगवद् गीता के पंद्रहवें अध्याय के अनुसार उनमें मान नहीं, कहीं मोह नहीं. वे जन्म लेते ही सूर्य को मुख में ले लेते हैं क्योंकि उनकी स्थिति भगवान् के जिस परमधाम में स्थित है, उसे सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि प्रकाशित नहीं करते हैं. वे भगवान् की उस भक्तिमणियुक्त रामनाम की मुद्रिका को मुख में धारण करते हैं, जिस भक्तिमणि को प्रकाशित होने के लिये कोई दिया, घृत और बत्ती की आवश्यकता नहीं होती है.