बालूमाथ (लातेहार)। एनएलसी इंडिया लिमिटेड कंपनी की बालूमाथ स्थित प्रस्तावित नॉर्थ धाधू ओपनकास्ट कोल माइनिंग परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है. परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए 27 अगस्त को प्रस्तावित जनसुनवाई को रद्द कराने की मांग को लेकर भैसादोन के दुर्गा मंडप परिसर में ग्रामीणों की बैठक ग्रामप्रधान बिहारी यादव कि अध्यक्षता में हुई. बैठक में भैसादोन, धांधू, नावाडीह, सेमरसोत और हेमपुर सहित परियोजना से प्रभावित एवं विस्थापित होने वाले गांवों के ग्रामीण शामिल हुए. ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी उपजाऊ खेती की जमीन को कोयला खनन के लिए नहीं देंगे. ग्रामीणों ने प्रस्तावित पर्यावरणीय जन सुनवाई का पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया. ग्रामीणों का कहना है, कि खनन परियोजना से उनकी कृषि भूमि, मकान, जंगल, जलस्रोत और आजीविका प्रभावित होगी. वर्षों से जिस जमीन पर खेती कर परिवार का भरण पोषण कर रहे है, उसे छोड़ना उनके लिए संभव नहीं है. ग्रामीणों ने कहा कि विकास के नाम पर उन्हें विस्थापित कर उनकी जमीन से उन्हें बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है. इस संबंध में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा जारी पत्र के अनुसार नॉर्थ धाधू ओपनकास्ट कोल माइनिंग परियोजना की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 4.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष है. परियोजना का खनन क्षेत्र 714.54 हेक्टेयर निर्धारित है. परियोजना में हेमपुर, भैसादोन, सेमरसोत, धाधू, चितरपुर एवं नावाडीह गांव शामिल हैं. पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर 27 अगस्त 2026 को सुबह साढ़े ग्यारह बजे बालूमाथ अंचल कार्यालय में लोक सुनवाई निर्धारित की गई है. उक्त प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई के खिलाफ हुई इस बैठक में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी जमीन और भविष्य की सुरक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखेंगे. ग्रामीणों ने प्रशासन एवं संबंधित कंपनी से प्रस्तावित लोक सुनवाई को रद्द करने तथा ग्रामीणों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है. बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे. ज्ञात हो कि इससे पूर्व तीन माह पूर्व एक जून को बालूमाथ स्थित प्रखंड सह अंचल परिसर में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई का ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. जिससे आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई बेनतीजा समाप्त हो गई थी.