


उन्होने संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी महिला-संचालित आध्यात्मिक संस्था है. यहां नेतृत्व मातृशक्ति द्वारा किया जाता है, जो समानता और सहयोग पर आधारित है. इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है. इससे पहले पूर्व मंत्री श्री राम ने ब्रह्मा बाबा के चित्र पर माल्यापर्ण किया और उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी. मौके पर संस्था की संचालिका बीके अमृता ने ब्रह्मा बाबा के जीवन परिचय दिया. उन्होने बताया कि ब्रह्मा बाबा का नाम लेखराज कृपलानी था. उन्होने 1930 के दशक में हैदराबाद (सिंध, अविभाजित भारत) में अपनी संपत्ति दान कर दी और संस्था का संचालन समर्पित महिलाओं को सौंप दिया.
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की शाखायें 140 से ज़्यादा देशों में फैली है और संयुक्त राष्ट्र की गैर-सरकारी संगठन भी है. 18 जनवरी 1969 को उन्होने अपना भौतिक शरीर त्यागा. प्रत्येक वर्ष दिस दिन को ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है. कार्यक्रम में बीके नवीन, बिनोद, ब्रजेश, अवधेश, आशीष, मुरली, अनिल, अजय, सुनीता, ज्योति, पूनम, संध्या, गंगोत्री, जमनी व जीवंती समेंत कई ब्रह्रमाकुमारीज मौजूद थे. 