लातेहार
मनरेगा मजदूरों के अस्तित्व पर संकट, संघर्ष ही एक मात्र रास्ता है: जेम्स हेरेंज
नई दिल्ली में रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लिया


सरकार इसमें साल में 125 दिन रोजगार देने की गारंटी की है. हेरेंज ने कहा कि यह एक मात्र जुमला है. उन्होने कहा कि जब मनरेगा में 100 दिनों के काम की गारंटी थी, तब भी किसी मजदूर को 100 दिन का काम नहीं मिला. इसका राष्ट्रीय औसत 53 दिन तक गया था. वीबी-रामजी योजना में 60 दिन बरसात में काम नहीं होगें. तब साल में मात्र 10 महीने ही बचे. जब मनरेगा में 12 महीने में 100 दिन काम नहीं मिले तो इस कानून में 10 महीने में 125 दिन काम कैसे मिलेगें.
उन्होने आगे कहा कि इसमें बजट डिवाइड भी व्यवहारिक नहीं है. इसमें 40 प्रतिशत राज्य सरकार को वहन करना है. कई ऐसे राज्य हैं तो पहले से ही वित्ती्य बोझ से दबेे हुुए हैं. अब उनको केंद्र सरकार की स्कीम को सफल बनाने के लिए अपना 40 प्रतिशत लगाना होगा, ऐसा कौन राज्य सरकार चाहेगी कि हम अपना पैसा लगा कर उनकेे कार्यक्रम को सफल बनावें. उन्होने आगे कहा कि छोटे राज्यों को केंद्र सरकार हमेशा परेशान करती रही है. आगे भी परेशान करेगी.
उन्होने कहा कि झारखंड की सरकार पिछले तीन साल से माइनिंग की रायल्टी 136 करोड़ मांग रही है, लेकिन केंद्र सरकार नहीं दे रही है. पंचायतों के विकास के लिए आवंटित फंड दो साल से नहींं मिल रहा है. इसके अलावा जल जीवन मिशन का पैसा भी केंद्र सरकार के पास अटका हुआ है. 