


उन्होने बताया कि रतन साहू की इच्छा से यहां मंदिर निर्माण की पहल हुई थी. यह स्थल लातेहार मौजा, बानपुर मौजा और राजहर मौजा नों गांवों के मिलन बिंदु पर स्थित है. यहां शास्त्रीय विधि से भगवान शंकर की मूर्ति स्थापित की गई. मंदिर के समीप बहने वाली जयत्री नदी में श्रद्धालु स्नान कर पूजा-अर्चना करते थे. हालांकि अब नदी प्रदूषित और संर्कीण हो चुकी है. बता दें कि लातेहार में महाशिवरात्रि के मौके पर लगने वाला यह मेला पशु मेला के रूप में जाना जाता था. यह मेला गाय-बैल की खरीद बिक्री के लिए प्रसिद्ध था. ग्रामीण यहां से सालभर का राशन और मसाले खरीदते थे. आज आधुनिक स्वरूप में आयोजित हो रहा यह मेला महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर को समर्पित होता है. मंदिर प्रांगण में जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं.