


स्थिति यह थी कि आधा दर्जन से अधिक मरीजों को बाहर बेड पर सुलाया गया था. कड़ाके की ठंड के बावजूद किसी भी मरीज को न तो बेडशीट उपलब्ध कराई गई थी और न ही कंबल. इसके अलावा ऑपरेशन रूम में भी गंदगी का अंबार लगा हुआ था. इस अव्यवस्था को देखकर सांसद प्रतिनिधि एवं प्रखंड प्रमुख ने कड़ी नाराजगी जताते हुए मौके पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को तलब किया और व्यवस्था को लेकर फटकार लगाई.
उनके हस्तक्षेप के बाद आनन-फानन में मरीजों के लिए बेडसीट एवं कंबल की व्यवस्था कराई गई. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था एनजीओ के माध्यम से होनी थी, लेकिन एनजीओ केवल खानापूर्ति कर बंध्याकरण कराकर मौके से रवाना हो गया. बड़ी संख्या में मरीजों की मौजूदगी के बावजूद समुचित व्यवस्था नहीं होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है. 