


इस अवसर पर कार्यक्रम में जीसीआरपी, बीपीएम व सीसी की विशेष उपस्थिति रही. वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि डायन कुप्रथा और बाल विवाह न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि समाज की प्रगति में भी बड़ी बाधा हैं. इन कुप्रथाओं के कारण महिलाओं और बालिकाओं को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक शोषण का सामना करना पड़ता है. ऐसे में जेएसएलपीएस के माध्यम से चलाया जा रहा यह अभियान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण समुदायों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से ही इन कुप्रथाओं को जड़ से समाप्त किया जा सकता है. इस मौके पर प्रियंका देवी, गीता देवी, मुनिता उरांव, सविता देवी, अनिता शर्मा, दीपिका देवी, सरिता देवी, समेंत कई लोग मौजूद थे. 