
महुआडांड़ (लातेहार)। ख्रीस्तीयों का प्रमुख पर्व पास्का तीन दिवसीय विशेष समारोह के खजूर रविवार से हुई. इसके बाद पुण्य बृहस्पतिवार के दिन प्रभु यीशु मसीह के दुखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान की स्मृति में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. पुण्य बृहस्पतिवार के अवसर पर महुआडांड़ माता पल्ली में विशेष विनीत पूजा का आयोजन किया गया। इस दौरान फादर दिलीप ने अपने संदेश में कहा कि “सबसे पहले ईश्वर से प्रेम करें और अपने आसपास के लोगों से भी प्रेम करें, यही सच्ची शिक्षा है।”
उन्होंने बताया कि नए विधान के अनुसार प्रभु यीशु मसीह ने अपने दुखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान से पहले अपने शिष्यों के साथ अंतिम भोजन (अंतिम ब्यारी) किया। इस दौरान उन्होंने विनम्रता और सेवा का संदेश देते हुए स्वयं अपने शिष्यों के पैर धोए और पवित्र यूखरिस्त तथा पुरोहिताई संस्कार की स्थापना की। उन्होंने कहा, “मेरी याद में यह किया करो” और साथ ही एक-दूसरे से प्रेम करने की शिक्षा दी।उन्होंने कहा कि इस पर्व का उद्देश्य है कि हम नम्रता और निस्वार्थ भाव से सेवा करें, आपसी प्रेम और एकता को बढ़ाएं तथा एक-दूसरे के लिए त्याग की भावना रखें।इस अवसर पर पल्ली पुरोहित फादर सुरेश किंडो, फादर एम.के. जोश, बरथोलोमी, पतरस और एडवर्ड सहित अन्य फादरों ने महुआडांड़ पल्ली से चुने गए 12 व्यक्तियों के पैर धोकर प्रभु यीशु द्वारा अपने शिष्यों के पैर धोने की परंपरा को दोहराया और उन्हें अंगवस्त्र भेंट किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ईसाई धर्मावलंबियों ने भाग लिया। आयोजन को सफल बनाने में हेड प्रचारक आनंद, सिस्टर स्वाति, महिला संघ और युवा संघ का विशेष योगदान रहा। इधर साले, गोठगांव, पकरीपाठ, तुन्दटोली, चेतमा दौना और चोरोपाठ के चर्चों में भी विशेष प्रार्थना और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया।



