बालूमाथ (लातेहार)। इमारत-ए-शरिया कौम की फलाह के लिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच कर अपनी खिदमत को अंजाम दे रही है. उक्त बातें मुसलमानों की प्रसिद्ध संस्थान इमारत-ए-शरिया बिहार , झारखंड, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल के अमीर-ए-शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने कही अमीर-ए-शरीयत मंगलवार की शाम बालूमाथ स्थित जामा मस्जिद में दारुल कज़ा की स्थापना के अवसर आयोजित अजीमुश्शान जलसा में मौजूद मजमा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि इस्लाम के एहकाम को अपना कर ही कौम तरक्की कर सकती है. अमीर-ए-शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने आगे कहा कि इस्लाम की तालीम हक़ और सच की है. हक़ और सच के रस्ते में कठिनाइयां तो आएंगी. जो इस रास्ते पर चलेगा वही अल्लाह की रज़ा हासिल कर पाएगा. उन्होंने दारुल कज़ा की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे लातेहार जिले के साथ आसपास की बड़ी आबादी को अपने मामलात का हल करवाने में आसानी होगी. इमारत-ए-शरिया के सदर काजी अज़ार कासमी ने कहा कि ये सरजमीं बुजुर्गों के मेहनत का मैदान रहा है. ऐसे में यह जरूरी था कि बड़ी आबादी को अपने मामले हल करवाने के लिए बाहर जाने की मजबूरी का हल निकाला जाए. नायब नाजिम मुफ्ती शोहराब नदवी ने कहा कि इमारत-ए-शरिया के लगभग सौ दारुल कज़ा इस वक्त कार्यरत हैं. जहां मुसलमानों के शादी ब्याह, आपसी मामलात, जायदाद की तकसीमी समेत छोटे बड़े मसले का समाधान इस्लामिक तरीके से किया जा रहा है. जलसे को मुफ्ती सुहैल अख्तर कासमी, साप्ताहिक नक़ीब के नायब एडिटर मौलाना रिजवान नदवी, जमशेदपुर के शहर काजी सऊद आलम समेत कई इस्लामिक विद्वानों ने संबोधित किया व इमारत-ए-शरिया के कामों को सराहनीय बताया. इससे पूर्व जलसे का आगाज तिलावत-ए-कुरान-पाक से हाफिज अबु तल्हा ने की. स्वागत तकरीर मौलाना अब्दुल वाजिद चतुर्वेदी के द्वारा किया गया. मौके पर अमीर-ए-शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने शुरू हो रहे दारुल कज़ा के लिए मुफ्ती उमर फारूक कासमी को काजी नियुक्त करते हुए दस्तार बांधी व हलफ दिलाया. जलसे का संचालन मौलाना अब्दुल वाजिद चतुर्वेदी व मौलाना मुफ्ती मुजीबुर्रहमान ने संयुक्त रूप से की. जलसे के दौरान मुंगेर से आए नातखां ने एक से बढ़कर एक नात पेशकर महफिल की वाहवाही बटोरी. मुल्क में अमनशांति, भाईचारगी व तरक्की की दुआ के साथ जलसे का समापन हुआ. धन्यवाद ज्ञापन इस्तेकबलिया कमिटी के सदर मौलाना जियाउल्लाह मजाहिरी ने की. जलसे को सफल बनाने में अंजुमन के सदर हाजी शब्बीर, हाजी तौकीर अहमद, हाजी-मोती-उर-रहमान, हाजी अतीक-उर-रहमान, युवा समाजसेवी मुजम्मिल हुसैन, मो नौशाद, जमील अख्तर की महत्वपूर्ण भूमिका रही. मौके पर हाजी जैनुल आबेदीन, मौलाना मजहर, कारी मोहम्मद अली , मौलाना तौकीर अफंदी, मुफ्ती शाहबाज नदीम, कारी साजिद, पपणू कुरैशी, मुजिबुल कुरैशी, जहूर अंसारी, मास्टर तैय्यब, मौलाना अताउल्लाह समेत मुरपा, जिलंगा, शेरगाड़ा, जर्री, बसिया, पिंडारकोम, मकइय्यतांड, धाधू, मासियातु, फुलसू, इटके, शिबला, दाढ़ा, डीही, मुरूप, डूरुआ समेत अनेक गांव से बड़ी संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबी मौजूद थे.