बरवाडीह (लातेहार)। घड़ी की सुई 11 बजे पार कर गई, लेकिन उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय गेठा का ताला नहीं खुला. बच्चे आते रहे और बरामदा में बस्ता ले कर मास्टर साब का इंतजार करते रहे, मगर न प्रधानाध्यापक पहुंचे और न ही रसोइया. स्कूल परिसर में पसरा सन्नाटा सरकारी शिक्षा व्यवस्था की हकीकत बयां कर रहा था. सबसे गंभीर बात यह है कि यह विद्यालय हारतू पंचायत के उस इलाके में स्थित है, जहां कोरवा और परहिया जैसे आदिम जनजाति समुदाय के बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं. इन परिवारों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल ही शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण सहारा है. अभिभावक अपने बच्चों को इस उम्मीद से स्कूल भेजते हैं कि पढ़-लिखकर वे गरीबी और अभाव से बाहर निकलेंगे. लेकिन जब स्कूल समय पर खुले ही नहीं और शिक्षक विद्यालय में मौजूद न रहें, तो इन मासूमों के भविष्य की जिम्मेदारी आखिर किसके भरोसे है?
स्कूल के बरामदे में खड़े–खड़े इंतजार करते रहे बच्चे
शनिवार को सुबह से ही कुछ बच्चे विद्यालय पहुंच गए थे. बच्चे स्कूल के बाहर और बरामदे में खड़े–खड़े शिक्षक के आने का इंतजार करते रहे. समय बीतता गया, लेकिन विद्यालय नहीं खुला. करीब 11 बजे तक न तो प्रधानाध्यापक दिनेश सोनी पहुंचे थे और न ही रसोइया. इससे विद्यालय में बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन बनने की व्यवस्था भी नहीं हो सकी. बच्चों को शायद यह भी पता नहीं था कि स्कूल क्यों नहीं खुल रहा है. उनके लिए शिक्षक का इंतजार करना ही उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया. वे कुछ देर तक इधर-उधर देखते रहे और फिर बरामदे में बैठ गए. यह दृश्य उस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, जिसके तहत सरकार बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है.
ग्रामीण बोले- शिक्षक के गायब रहने की शिकायत नई नहीं
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक दिनेश सोनी के विद्यालय से गायब रहने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद यदि कार्रवाई प्रभावी नहीं हुई, तो इससे शिक्षक का मनोबल बढ़ा और विद्यालय संचालन को लेकर मनमानी जारी रही. वहीं विद्यालय के पास रहने वाले बुजुर्ग गणेश परहिया ने कहा कि प्रधानाध्यापक के स्कूल से गायब रहने का मामला नया नहीं है. उनका आरोप है कि शिक्षक अक्सर विद्यालय में नहीं रहते, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. उन्होंने विभाग से ऐसे शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. ग्रामीणों का कहना है कि आदिम जनजाति परिवारों के बच्चे पहले ही कई तरह के अभावों के बीच शिक्षा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में यदि स्कूल में शिक्षक ही नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होंगे तो बच्चों की पढ़ाई का नुकसान कौन पूरा करेगा.
पहले भी शिकायत पर बंद हुआ था वेतन, अब कड़ी कार्रवाई के संकेत
मामले को लेकर लातेहार डीएसई ऋषिकेश कुमार ने दूरभाष पर कहा कि शिक्षक दिनेश सोनी के खिलाफ पहले भी शिकायत मिली थी. शिकायत के आधार पर उनका वेतन बंद किया गया था. इसके बावजूद उनके कार्य व्यवहार में सुधार नहीं हुआ. डीएससी ने कहा कि अब मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.