ग्रामीण बोले- जल, जंगल, जमीन पर अधिकार से समझौता नहीं, मांगें नहीं मानी तो आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
बरवाडीह (लातेहार)। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर छिपादोहर में रविवार को आदिवासी समाज का आक्रोश सड़क पर उतर आया. वन विभाग की कार्यशैली और कथित तौर पर पारंपरिक वन अधिकारों की अनदेखी के विरोध में हजारों ग्रामीणों ने जुलूस निकालकर वन विभाग कार्यालय का घेराव किया. ग्रामीणों के आंदोलन के समर्थन में छिपादोहर बाजार भी बंद रहा. व्यवसायियों ने अपनी दुकानें बंद रखकर आंदोलन के प्रति समर्थन जताया. ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की नीतियों के कारण क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विकास कार्य वर्षों से प्रभावित हैं. ग्रामीण छिपादोहर-हेहेगड़ा तीसरी रेलवे लाइन के लिए एनओसी, लाभर-टोंगारी, लाभर-कोरवामड़ई और बारीदोहर-सैदुप सड़क निर्माण के लिए वन विभाग की स्वीकृति तथा वन अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए जरूरी वन विभाग की स्वीकृति नहीं मिलने से क्षेत्र के लोगों को इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है.
छिपादोहर गांधी मैदान से निकला जुलूस, वन कार्यालय पर प्रदर्शन
वन विभाग के घेराव से पहले छिपादोहर गांधी मैदान में विश्व आदिवासी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. भगवान बिरसा मुंडा और अमर शहीद नीलांबर-पीतांबर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए. कार्यक्रम के बाद हजारों ग्रामीण जुलूस की शक्ल में मुख्य सड़क से होते हुए वन विभाग कार्यालय पहुंचे. ग्रामीणों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए कार्यालय का घेराव किया. प्रदर्शन के दौरान डीएफओ प्रजेशकांत जेना को मौके पर बुलाने की मांग पर ग्रामीण अंत तक अड़े रहे. बाद में रेंजर अजय टोप्पो को मांग पत्र सौंपा गया.
अधिकारों की रक्षा ही आदिवासी गौरव की रक्षा
मुखिया संघ के अध्यक्ष सुभाष सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा ही सही अर्थों में आदिवासी गौरव की रक्षा होगी. उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी. फादर अमित खाखा ने कहा कि आदिवासी समाज आदिकाल से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करता आया है. इसके बावजूद आज उसी समाज को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. प्रखंड प्रमुख सुशीला देवी ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया. वहीं देवनाथ सिंह ने कहा कि वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है. विकास और विस्थापन को लेकर वन विभाग की नीतियों से क्षेत्र का आदिवासी समाज आहत है. ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में सांसद प्रतिनिधि भीमानन्द गिरी, उमेश चंद्रवंशी, मुन्ना गुप्ता, विजय कुमार प्रसाद, सुनील कुमार, महेश अग्रवाल, चंदू प्रसाद, दीपा देवी, ब्रिजिनीया कच्छप पुष्पा मिंज समेत अन्य लोगों ने योगदान दिया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे.