महुआडांड़/नेतरहाट(लातेहार)। नेतरहाट आवासीय विद्यालय में प्रशासनिक गतिविधियों को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है. विद्यालय से सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए राम प्रताप प्रसाद की पुनर्नियुक्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि उन्हें 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्ति के बाद श्री रवि रंजन द्वारा एडहॉक सभापति के निर्देश पर पुनः कार्य पर रखा गया है. मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल नियुक्ति की वैधानिक प्रक्रिया, सेवा शर्तों और मानदेय के निर्धारण को लेकर उठ रहा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुनर्नियुक्ति संबंधी निर्देश तो जारी किया गया, लेकिन नियुक्ति की अवधि, कार्य एवं दायित्व, सेवा की शर्तें तथा देय मानदेय/वेतन का स्पष्ट निर्धारण नहीं किया गया है.ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि यदि भविष्य में संबंधित व्यक्ति द्वारा मानदेय अथवा अन्य वित्तीय लाभ का दावा किया जाता है, तो उसका भुगतान किस प्रावधान के तहत और किस सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा. साथ ही, मानदेय की राशि किस आधार पर निर्धारित होगी, यह भी स्पष्ट नहीं है. मामले को लेकर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद किसी कर्मचारी की पुनर्नियुक्ति के लिए निर्धारित नियमों एवं सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति का पालन किया गया है. विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय दायित्वों को देखते हुए नियुक्ति से संबंधित स्पष्ट आदेश एवं निर्धारित सेवा शर्तों का होना आवश्यक माना जाता है. इस संबंध में एडहॉक सभापति राज कुमार से जब स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया, तो कथित तौर पर नियुक्ति की सेवा शर्तों और मानदेय के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई कह कर फोन काट दिया गया. उल्लेखनीय है कि नेतरहाट आवासीय विद्यालय में प्राचार्य पद के प्रभार और एडहॉक समिति की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से ही विवाद की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में सेवानिवृत्त कर्मी की पुनर्नियुक्ति ने विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.