लातेहार। शहर के कीनामाड़ स्थित दूध फैक्ट्री के समीप श्मशान घाट में शेड नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बारिश हो या तेज धूप, शव के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना पड़ता है. ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों ने श्मशान शेड समेत कई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया था, लेकिन चुनाव बीतने के करीब दो वर्ष बाद भी यह वादा धरातल पर नहीं उतर सका है.
कीनामाड़ के इस श्मशान घाट पर आसपास के बड़ी आबादी वाले इलाकों से लोग अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं. फॉरेस्ट कॉलोनी, बिजली कॉलोनी, चंदनडीह समेत आसपास के कई मोहल्लों के लोग इसी स्थान का इस्तेमाल करते हैं. इसके बावजूद यहां शवों के अंतिम संस्कार के लिए जरूरी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान शेड निर्माण की मांग को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया। हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ. ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब चुनाव के समय बड़े-बड़े विकास कार्यों का वादा किया जाता है, तो अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी और मानवीय जरूरत के लिए एक शेड बनाने में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है. ग्रामीणों ने सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि श्मशान घाट में जल्द से जल्द शेड का निर्माण कराया जाए. उनका कहना है कि किसी परिवार के लिए अपने परिजन को अंतिम विदाई देना बेहद संवेदनशील समय होता है. ऐसे समय में मौसम की मार और अव्यवस्था झेलना ग्रामीणों के लिए किसी पीड़ा से कम नहीं है.अब सवाल यह है कि चुनाव के समय किए गए वादों का हिसाब कौन देगा. दो वर्ष बीत जाने के बाद भी यदि श्मशान घाट जैसी बुनियादी सुविधा के लिए ग्रामीणों को आवाज उठानी पड़ रही है, तो विकास के दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है.