लातेहार। शहर के चंदनडीह अंचल में हर वर्ष धूमधाम से मनाये जाने वाले करमा (कर्म) पर्व इस बार भी धूमधाम से मनाया गया। स्थानीय महिला एवं कन्याओं ने पारंपरिक लोकगीतों एवं सामूहिक नृत्यों के साथ व्रत रखकर करम देव की पूजा-अर्चना में रस घोला। विशेष रूप से चंदनडीह के कोने-कोने में ‘अखड़ा’ सजाए गए, जहां युवा-युवती ढोल-नगाड़े की थाप पर थिरकते हुए भूमि और प्रकृति की उपज व रक्षा की कामना करते नजर आए।
चंदनडीह, उदयपुरा, जंगलदगा और सबानो जैसी ग्रामीण क्षेत्रों में पूजा के दौरान व्रतधारिणी कन्याएं करम डाल की स्थापना कर पिता, भाई और समाज की समृद्धि के लिए विधिवत पूजा करती रहीं. तत्पश्चात पुरोहित सिबू लोहरा ने करमा-धरमा की प्रेरक कथा सुनाई—जो प्राकृतिक संजीवनी के साथ भाई-बहन के अटूट प्रेम और मानवता के मूल सिद्धांतों का प्रतीक है. सभी करमैतियों ने पारंपरिक लोकगीत गाए और कृषि-उत्पादकता के लिए शुभ ऊर्जा का संकल्प लिया.
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शाम होते ही अखाड़े में यह महोत्सव रंगारंग सांस्कृतिक प्रदर्शन में तब्दील हो गया। सैकड़ों की संख्या में लोग नृत्य, गीत और सामूहिक उत्साह के संग एकता का संदेश फैलाते दिखे. ग्राम के पुरोहित सिबु लोहरा ने इस अवसर पर कहा कि करमा पर्व न केवल भाई-बहन के प्रेम और कृषि की समृद्धि का पर्व है, बल्कि प्रकृति संरक्षण की सीख भी देता है। मौके पर मौजूद डीगू उरांव संतोष गोस्वामी, छोटन सिंह, विक्की गर्ग, गुन्नू लोहरा जुनेश लोहरा, गुलाबी भुइया, संतोष भुइया, छोटू भुइया, हीरामन भुइया, मोहन पासवान, गन्नू भुइया, गनौरी भुइया,नरेश भुइया, विष्णु देव उरांव एवं समिति के सभी सदस्य गण मौजूद थे।