बालूमाथ (लातेहार)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आलिम फाजिल डिग्रियों को मान्यता देकर अल्पसंख्यक समाज के हित में बड़ा कदम उठाया है. उक्त बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा केंद्रीय सदस्य सह बालूमाथ निवासी जुनैद अनवर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही. उन्होंने कहा कि लम्बे समय से झारखंड में आलिम फाजिल की डिग्री प्राप्त हजारों छात्र सरकारी नौकरियों से वंचित थे. इन डिग्रियों को मान्यता न मिलने से छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया था. पूरे अल्पसंख्यक समुदाय में गहरी निराशा व्याप्त थी. इसका सबसे बड़ा असर सहायक आचार्य की भर्ती पर पड़ा. चयनित सैकड़ों आलिम फाजिल छात्रों की नियुक्ति वर्षों से अटकी हुई थी.
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इस गंभीर समस्या को झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने बहुत संजीदगी से उठाया और इसे राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में लाया. मुख्यमंत्री ने स्वयं इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर व्यक्तिगत रूप से विचार किया तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल उचित दिशा निर्देश देकर इस मामले में पहल किया. प्रयासों के परिणामस्वरूप झारखंड सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए आलिम- फाजिल डिग्रियों को पुनः सरकारी नौकरियों के लिए मान्यता प्रदान कर दी है.
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इस निर्णय से न केवल सहायक आचार्य भर्ती में अटके सभी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि भविष्य में भी हजारों आलिम फ़ाज़िल छात्र बिना किसी बाधा के सरकारी नौकरियों में आवेदन कर सकेंगे. उन्होंने इस फैसले को झारखंड में शिक्षा की समानता, प्रतिभा के सम्मान और सामाजिक न्याय की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है. जुनैद अनवर ने कहा कि राज्य के समस्त अल्पसंख्यक समुदाय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन का हृदय से आभार व्यक्त करता है.