महुआडांड़ (लातेहार)। महुआडांड़ के बड़े चर्च सहित पूरे प्रखंड के सभी चर्चों में बुधवार को राखबुधवार के साथ कैथोलिक विश्वासी चालीसा काल का शुभारंभ हुआ। चालीसा काल कृपाओं से परिपूर्ण माना जाता है, जिसकी शुरुआत विश्वासी अपने माथे पर राख लगाकर करते हैं। यह राख पूर्व वर्षों में खजूर रविवार की आशिष के बाद उपयोग में लाई गई खजूर की डालियों से तैयार की जाती है। प्रतीकात्मक रूप से यह संकेत देती है कि मनुष्य मिट्टी से बना है और एक दिन उसी मिट्टी में मिल जाना है। इस अवसर पर फादर सुरेश किड़ो ने अपने संदेश में कहा कि चालीसा काल टूटे हुए रिश्तों को जोड़ने और मेल-मिलाप से रहने का समय है। उन्होंने कहा कि हमें अपने जीवन की सभी बुराइयों को त्यागना चाहिए और जो रिश्ते टूट गए हैं, उन्हें फिर से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। हमारे प्रभु येसु, जो प्रेम के ईश्वर हैं, हमसे यही चाहते हैं कि हम एक-दूसरे से प्रेम करें।फादर किड़ो ने बताया कि उपवास केवल भोजन से नहीं, बल्कि गलत विचारों, गलत कार्यों और समाज व जीवन के लिए हानिकारक आदतों से भी करना चाहिए। चालीसा काल हमारे जीवन को सुंदर और पवित्र बनाने का समय है। उन्होंने लोगों से गपशप से बचने और दूसरों के बारे में गलत बोलने से परहेज करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चालीसा काल में ख्रीस्तियों के लिए तीन मुख्य स्तंभ निर्धारित हैं—प्रार्थना, उपवास और परोपकार। इन तीनों का पालन करने का कलीसिया हमसे आह्वान करती है। प्रार्थना के माध्यम से हम प्रभु से जुड़ते हैं, उपवास से आत्म-संयम में वृद्धि होती है और परोपकार के द्वारा हम दीन-हीनों में प्रभु की छवि देखकर उनकी सेवा करते हैं। आरामदायक जीवन-शैली से ऊपर उठना एक तपस्या है, और यह पवित्र काल हमें त्याग व बलिदान की ओर प्रेरित करता है। चालीसा काल विशेष कृपाएँ अर्जित करने का शुभ अवसर है, क्योंकि इस अवधि में हम मानव जाति के उद्धार के लिए येसु ख्रीस्त द्वारा सहन किए गए दुःखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान का स्मरण करते हैं। इस दौरान हम उनके क्रूस-पथ पर सिरीनी के सिमोन के समान उनके साथ यात्रा करते हैं। राख बुधवार की मिस्सा पूजा के साथ ही चालीसा का पवित्र काल प्रारंभ हो गया। मौके पर फादर और सिस्टरों द्वारा उपस्थित सभी ईसाई धर्मावलंबियों के माथे पर राख लगाकर इस पवित्र महीने की शुरुआत कराई गई। इस अवसर पर हेड प्रचारक आनंद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु चर्च में उपस्थित रहे।