



उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पूर्व 543 उर्दू स्कूलों का स्टेटस बदलकर सामान्य विद्यालय कर दिया गया तथा बिहार से मिले 4401 उर्दू सहायक शिक्षक पदों में से 3712 रिक्त पदों को सरेंडर कर दिया गया. उन्होंने कहा कि राज्य में हुए 68 मॉब लिंचिंग मामलों के बावजूद सदन से पारित भीड़ नियंत्रण रोकथाम बिल लागू नहीं किया गया.
अल्पसंख्यकों के लिए रोजगार योजनाओं, बनकर-टेलरिंग समितियों को सरकारी कार्य, धार्मिक स्थलों को भूमि पट्टा और सरकारी-निजी नौकरियों में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर भी सरकार की उपेक्षा जारी है. महाबैठक की अध्यक्षता अंजुमन इस्लामिया लातेहार के संरक्षक शमसुल होदा ने और संचालन कारी बरकत उल्लाह रिज़वी ने की। बैठक में अंजुमन इस्लामिया लातेहार के अध्यक्ष अफताब आलम, सचिव रिजवान अली, मदरसा शिक्षक संघ के सचिव फजलूल कदीर, मुफ्ती मोदस्सिर आलम अमजदी, मुफ्ती मोहसिन आजम, कारी जावेद, मौलान रियाजउद्दीन, कारी इरफान रजा, मौलान फैजान रजा, आमया संगठन के संगठन प्रभारी जियाउद्दीन अंसारी, सद्दाम खान, वारिस अंसारी, अख्तर अंसारी, डां कोनेन, सरताज आलम, मेराजुल हक, लाडले खान, बेलाल अहमद, अयुब अंसारी, अलीमुद्दीन अंसारी, मास्टर रशीद, इस्माइल अंसारी, मौलान नजीर, एहसान अंसारी एवं जिला व प्रखंड के उलमा, दानिश्वर, सदर सेक्रेट्री मौजूद थे।अध्यक्षता कर रहे श्री होदा ने कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो विधानसभा सत्र के दौरान राज्यभर में सामूहिक प्रदर्शन किया जाएगा. बैठक में कई सामाजिक व धार्मिक प्रतिनिधि उपस्थित थे. 