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क्षेत्रीय भाषाओं की उपेक्षा सरकार को भारी पड़ सकती है: केएन त्रिपाठी

लातेहार में पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी का बयान

लातेहार। झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने राज्य सरकार की भाषा नीति पर तीखा हमला बोला.  उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को उनकी पार्टी का समर्थन जरूर प्राप्त है, लेकिन सरकार कई अन्याय पूर्ण और विभाजनकारी निर्णय ले रही है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों में असंतोष बढ़ रहा है. श्री त्रिपाठी चार अप्रैल को शहर के होटल कार्निवाल में एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत हुुए उक्‍त बातें कही. उन्‍होने कहा कि  पलामू प्रमंडल में मगही और भोजपुरी बोलने वालों की बड़ी आबादी है, संथाल परगना में अंगिका भाषा व्यापक रूप से बोली जाती है.

सरकार द्वारा जनजातीय भाषाओं में कुडुक को शामिल किया जाना स्वागत योग्य है, लेकिन कई जनजातीय समुदाय जैसे चेरो और खरवार कुडुक नहीं बोलते हैं, ऐसे में उनके लिए क्या व्यवस्था की गई है, यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में नागपुरी को शामिल किया गया है, जबकि कई जिलों में नागपुरी बोलने वालों की संख्या कम है और मगही बोलने वालों की संख्या अधिक है. इसके बावजूद मगही, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाओं को सूची से बाहर रखना दुर्भाग्यपूर्ण है. पूर्व मंत्री ने मांग की कि जिला स्तर पर जो भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं, उन्हें क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए. उन्‍होने कहा क‍ि अगर ऐसा नहीं हुआ तो सरकार को बड़े जनआंदोलन का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भाषाई पहचान लोगों की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ी होती है, इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.

Nihit

निहित कुमार, नगर संवाददाता, शुभम संवाद, लातेहार

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निहित कुमार, नगर संवाददाता, शुभम संवाद, लातेहार

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