लातेहार। आरटीआई एक्टिविस्ट रवि कुुुुमार डे ने कहा कि आज शिक्षा के नाम पर अभिभावकों के जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है. नीजि स्कूलों की मनमानी के कारण अभिभावक परेशान हैं. री-एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से भारी भरकम फीस वसूली जा रही है. जो अभिभावक असमर्थ हैं वे कर्ज आदि ले कर बच्चों का री-एडमिशन करा रहे हैं. जबकि सरकार की ओर से री-एडमिशन को ले कर कई दिशा निर्देश जारी किये जा चुके हैं. बावजूद इसके यह रूकने का नाम नहीं ले रहा है. अभी तक कई अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन अगली कक्षा में नहीं करा पाये हैं. श्री डे ने आगे कहा कि नीजि विद्यालयों की महंगी किताबें और फिक्स वेंडर भी एक परेशानी का सबब है. इन विद्यालयो के द्वारा प्रति वर्ष किताबें बदल दी जाती है. ऐसे में जिनके घरों में दो तीन बच्चे हैं वे उनकी किताबो का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं, उन्हें नयी किताबें खरीदनी पड़ती है. किताबें भी किसी खास दुकान या विद्यालय से खरीदना पड़ता है. ताजा मामलों में सामने आया है कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को एक ही दुकान या वेंडर से किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं. उन्होने इस पर अंकुश लगाने की अपील जिला प्रशासन से की है.