


मौके पर फादर जार्ज मोनोपॉली ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम का जिला प्रशासन खुला उल्लंघन कर वन आश्रित समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है. उनके कब्जे वाली वन भूमि पर वन रोपण द्वारा कब्जा करके लोगों को बेदखल किया जा रहा है. जिप सदस्य कन्हाई सिंह ने कहा कि वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत लातेहार जिले में सामुदायिक और व्यक्तिगत वनाधिकार की कुल सामुदायिक दावा 175 और 1800 व्यक्तिगत दावा अभिलेख अनुमंडल और जिले में लगभग ,15 वर्षों से हेमंत सरकार की घोर लापरवाही से लंबित है.
श्री सिंह ने कहा कि हमारे राज्य की हेमंत सरकार के मिली भगत से जिला प्रशासन आदिवासी और मूल निवासियों का अधिकार को छीनने का प्रयास कर रही है. सरकार सरल तरीकों से बड़े – बड़े पूंजीपतियों को ग्राम सभा की जमीन को खनन के लिए देना चाहती है. सामाजिक कार्यकर्ता जेम्स हेरेंज ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करने पर कानून का दुरुपयोग करके झूठे केस में उन्हें फंसा कर परेशान किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में एक भी पट्टा नहीं दिए गए.
जिले में व्यक्तिगत दावे के लगभग 1750, वही सामुदायिक वन पट्टा के लगभग 250 मामले लंबित हैं. जिप सदस्य, महुआडांड़ स्तेला नगेशिया ने कहा कि आज हम सभी आदिवासियों मूल निवासियों को संगठित होने की जरूरत है. झारखण्ड की हेमंत सरकार हमारे अधिकारों से हमें वंचित कर हमारे गांवों में, हमारे घरों में खनन करना शुरू कर देगी. सेलेस्टीन कुजूर ने कि हमारी आदिवासी सरकार हम आदिवासियों के लिए शोषण नीति लाने का प्रयास कर रही है.
नंद किशोर गंझु ने कहा कि जबतक लंबित दावों का निपटारा नहीं होता है, तब तक हमारा ये अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा. कार्यक्रम को गेंदिया देवी,प्रवेश राणा,भूखन सिंह,हरि कुमार भगत,रामेश्वर उरांव समेत कई कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया। मौके पर विनोद उरांव,रघुपाल सिंह, मुनेश्वर उरांव समेत कई लोग उपस्थित थे.