तत्पश्चात् दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्र के समक्ष माल्यार्पण कर दो मिनट का मौन धारण किया गया। इसके बाद अतिथियों को पगड़ी पहनकर स्वागत किया गया। सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर हमे आदिवासी समाज के पिछड़ेपन को एकजुटता के साथ दूर करने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि आदिवासियो की कला संस्कृति को संरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि सभी आदिवासी समाज के लोगो को एकजुटता से मिल कर रहने और अपनी परंपरा को संरक्षित करने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा,काबिलियत और अपने प्रतिभा के माध्यम से आज के नौजवान ऊंचाई तक पहुंच कर आदिवासी समाज का उत्थान कर सकते हैं। शिक्षा आदिवासी समाज को एक सभ्य सभ्यता की ओर ले जाने का माध्यम है। इसके लिए नौजवानों को ईमानदारी बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही आदिवासी समुदाय पहाड़ा व्यवस्था, ग्राम सभा ,जनजातीय उपयोग योजना ,भूमि पट्टा समेत अन्य योजनाओं के अधिकार के प्रति जागरूक हो सकते हैं। जिला परिषद विनोद उरांव कहा कि आदिवासियों का प्रकृति से काफी लगाव रहा है और इनके द्वारा ही प्रकृति की रक्षा करने का कार्य किया जाता रहा है। उन्होने कहा कि प्रकृति को संरक्षित करने वाले आदिवासी समाज पिछड़ रहा है, तो इसके कारणों की समीक्षा होनी चाहिए। सरना समिति के अध्यक्ष सेल्सटिन कुजूर ने जिले में आदिवासियों का विस्थापन होने से उनके रीति रिवाज परंपरा संस्कृति आदि सभी में बदलाव हो रहा है। उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित होकर शिक्षित होने की बात कहीं। अधिवक्ता बिरसा मुंडा ने कहा कि आदिवासी समाज काफी पिछे चला गया है, जिसे आगे आने के लिए शिक्षित होना आवश्यक है। केदार सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए बहुत सारी योजनाएं चली लेकिन इसका लाभ सही लोग नही उठा सके। उन्होने कहा कि आदिवासी समाज को आगे आने के लिए सबसे पहले संगठित होने की जरूरत है। स्वागत भाषण सरना समिति के सचिव बिरसा मुंडा ने दिया। मौके पर जानकी सिंह, नंदकिशोर सिंह, आर्सेन तिर्की, रिंकू कच्छप, शुकू उरांव, अनीता देवी, सुरेद्र उरांव, मोती उरांव, तुलेश्वर उरांव, रंथु उरांव, संजय उरांव, अमरेश उरांव, प्रवेश उरांव, अरूण सिंह, राजेंद्र सिंह, मुनेश्वर उरांव, कमलेश उरांव, रविंद्र उरांव, संतोष उरांव, रवि भगत समेत कई लोग उपस्थित थे।