कमरूल आरफी लातेहार। जिले बालूमाथ प्रखंड के नॉर्थ धाधू कोल परियोजना पूर्वी भाग में स्वामित्व प्राप्त करने वाली नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसी) की सहयोगी कंपनी एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड (एनएमएल) के खिलाफ परियोजना क्षेत्र के ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है. यह गुस्सा उस समय उफान पर आ गया जब उन्हें यह जानकारी मिली कि कंपनी के द्वारा परियोजना क्षेत्र के गेरेंजा गांव में करमा पर्व को लेकर मंगलवार को रात के अंधेरे में बच्चियों को बहला फुसला कर उनके बीच साड़ी बांटी गयी. जबकि ग्रामीण यहां खनन परियोजना के विरोध में हैं. गांव में फैलते ही ग्रामीणों का गुस्सा उबाल पर आ गया. बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठे हो गए.
एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे. कंपनी द्वारा बांटी गई साड़ियों को जमा कर विरोध स्वरूप ग्रामीणों ने जलाकर नष्ट कर दिया.
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ग्रामीण शंकर उरांव ने बताया कि पूरा गेरेंजा गांव खनन परियोजना के विरोध में है. ग्रामसभा के माध्यम से उपायुक्त लातेहार उत्कर्ष गुप्ता को आवेदन देकर परियोजना को बंद करने व किसी भी परस्थिति में खनन के लिए जमीन नहीं देने के निर्णय से अवगत कराया जा चुका है. फिर भी बिचौलियों के माध्यम से अपनी गतिविधि से ग्रामीणों को गुमराह करने का काम कर रही है.
ग्रामीण शिबू गंझू, सुकू उरांव, अर्जुन उरांव, कलावती देवी, अनिता देवी ने बताया कि पुरखों की हमारी जमीन है. कंपनी प्रलोभन देकर जमीन से हमें बेदखल करना चाहती है. हम जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे. मौके पर ललिता देवी, सीमा देवी, संजवा देवी, मानती देवी, सरिता देवी, मीना देवी, ललिता कुमारी, आरती कुमारी, चंद्रमनी कुमारी, तारा कुमारी, रूमा कुमारी, सुनीता देवी, फुलमनी देवी, शंकर उरांव, देवनाथा उरांव, अर्जुन उरांव, सावन उरांव, कुलेश्वर गझू, बिरजू उरांव समेत सैंकड़ों की संख्या में महिला पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे.
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जिन्होंने इच्छा जताई, उनके बीच ही बांटे गए वस्त्र: वरीय प्रबंधक
ग्रामीणों के विरोध के संबंध में पूछे जाने पर एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के भू अर्जन पदाधिकारी वरीय प्रबंधक सुशांत कुणाल ने बताया कि एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के द्वारा सामुदायिक विकास के अंतर्गत ग्रैंजा के ग्रामीणों के बीच कंपनी के कर्मियों के द्वारा कर्मा पर्व को लेकर साड़ी का वितरण किया गया है. जिन्होंने भी इच्छा जताई प्रभावित क्षेत्र के रैयत व जनजाति महिलाओं के बीच ही साड़ी बांटे गए हैं. उन्होंने कहा कि अगर साड़ियों को विरोध स्वरूप जलाया गया है तो यह अच्छी बात नहीं है.