


इस कानून के माध्यम से गांव को उसका असली मालिकाना हक मिला है. अब किसी भी योजना या निर्णय को लागू करने से पहले ग्राम सभा की स्वीकृति अनिवार्य होगी. उन्होंने कहा कि यही सच्चे अर्थों में गांव में “राम राज्य” की परिकल्पना है, जहां सभी गांववासी खुशहाल रहेंगे और अपने अधिकारों के साथ स्वशासन करेंगे. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस कानून से अब किसी भी आदिवासी या मूलवासी को छला नहीं जा सकेगा.
गांव के प्रधान, मुंडा और ग्राम सभा को जो अधिकार लंबे समय से चाहिए थे, वे अब हेमंत सोरेन सरकार ने दे दिए हैं. मौके पर पूर्व मंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष बैद्यनाथ राम, जिला 20 सूत्री उपाध्यक्ष अरुण कुमार दुबे, सचिव बुद्धेश्वर उरांव, शमशुल होदा, रीना उरांव, सुशील कुमार यादव सहित सभी प्रखंडों के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे. 