
महुआडांड़ (लातेहार)। डिपाटोली स्थित मदरसा अस सकाफतुल हनफिया फाउंडेशन लिल बनात में बच्चियों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में रविवार को कंप्यूटर लैब एवं सिलाई सेंटर का शुभारंभ किया गया। इसका उद्घाटन मौलाना तौफिक आलम मिस्बाही (सतबरवा), मौलाना मुस्ताक अहमद ज्याई, मौलाना रियाज रिजवी, मौलाना सुहेब रजा हनफी, सदर मौलाना रेहान रजा समेत अन्य लोगों ने कंप्यूटर का उद्घाटन एवं सिलाई मशीन चलाकर किया। मदरसा में बच्चियों को दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा भी दी जाती है। मदरसा के फाउंडर मौलाना मुस्ताक अहमद ज्याई ने बताया कि अब तक बच्चियों को दीनी एवं दुनियावी शिक्षा दी जा रही थी। अब उन्हें कंप्यूटर एवं सिलाई का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चियों को शिक्षा के साथ-साथ हुनरमंद बनाना है, ताकि भविष्य में वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकें और यह प्रशिक्षण उनके लिए आजीविका का साधन भी बन सके।उद्घाटन से पूर्व मौलाना मुस्ताक अहमद ज्याई की अगुवाई में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सतबरवा, पलामू से पहुंचे मौलाना तौफिक आलम मिस्बाही, मौलाना रियाज रिजवी एवं मौलाना सुहेब रजा हनफी ने इल्म की अहमियत और इल्म सीखने की फजीलत पर प्रकाश डाला। उन्होंने खासकर बच्चियों को अधिक से अधिक शिक्षा हासिल करने और दूसरों को भी शिक्षित करने के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने कहा कि एक बच्ची के शिक्षित होने का सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। शिक्षित बच्चियां अपने परिवार और समाज को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।वक्ताओं ने कहा कि बच्चियों को दीनी और दुनियावी शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर, सिलाई एवं अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे भविष्य में अपने पैरों पर खड़ी होकर स्वयं आजीविका अर्जित कर सकें तथा अपने और अपने परिवार का नाम रोशन कर सकें।कार्यक्रम के दौरान कारी नदीम अहमद एवं कारी अहमद रजा ने नात-ए-पाक पेश की, जिससे माहौल खुशनुमा हो गया। इसके बाद सलातो-सलाम, फातिहा एवं शिरनी का वितरण किया गया और कार्यक्रम का समापन हुआ।मौके पर हाफिज जावेद आलम, पूर्व सदर इमरान अली, हय्यूम अंसारी, नायब सदर सद्दाम उर्फ शेरू, खुर्शीद आलम, अब्दुल जब्बार अंसारी, नेजाम खान, इकबाल अहमद समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।



