लातेहार। डीएवी पब्लिक स्कूल, लातेहार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव हर्षोल्लास एवं भक्तिमय वातावरण में धूमधाम से मनाया गया. कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य घनश्याम कुमार सहाय, को-करिकुलर एक्टिविटीज प्रभारी सूरज कुमार मिश्रा, शिक्षक प्रभारी प्रभात रंजन सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ, सैकड़ों विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहे.। इस अवसर पर विद्यालय के नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी, कक्षा प्रथम एवं द्वितीय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. सभी बच्चे राधा-कृष्ण के मनमोहक वेश-भूषा में सज-धजकर विद्यालय पहुँचे. बच्चों ने राधा और नटखट कन्हैया का रूप धारण कर सभी का मन मोह लिया. उनके हाथों में मुरली, सिर पर मोरपंख तथा माखन की गगरी सहित विभिन्न आकर्षक सामग्री दिखाई दी. नन्हे-मुन्ने बच्चों की मनमोहक वेशभूषा और रूप-सज्जा ने पूरे विद्यालय परिसर को कृष्णमय बना दिया. कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं जन्माष्टमी से संबंधित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों को देखकर उपस्थित अभिभावक एवं शिक्षक-शिक्षिकाएँ भावविभोर हो उठे. श्रीकृष्ण के जयकारों एवं भक्ति गीतों से विद्यालय परिसर का वातावरण भक्तिमय एवं आनंदमय बना रहा. इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य घनश्याम कुमार सहाय ने बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, कर्तव्य, सत्य, कर्म एवं धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. ऐसे सांस्कृतिक एवं संस्कारपरक कार्यक्रम बच्चों को भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. कार्यक्रम को सफल बनाने में को-करिकुलर एक्टिविटीज प्रभारी सूरज कुमार मिश्रा, शिक्षक प्रभारी प्रभात रंजन सहित मातृशिक्षिकाओं भावना, अम्बिका, अर्चना, रुक्मिणी, अमृता, अंचला ,आरती ,मानसी ,सुप्रिया एवं सुजाता तथा विद्यालय के वरीय शिक्षक राकेश रंजन तिवारी ,रवि प्रकाश तिवारी ,सुशील दुबे एवं शिक्षिका खुशबु और अन्य सभी कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. सीसीए प्रभारी सूरज कुमार मिश्रा ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाली सभी मातृशिक्षिकाओं, बच्चों एवं उनके अभिभावकों के प्रति हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया. प्रभात रंजन ने कहा कि मातृशिक्षिकाओं एवं अभिभावकों ने बच्चों की आकर्षक वेशभूषा, रूप-सज्जा तथा मुरली, मोरपंख, माखन की गगरी सहित आवश्यक सामग्री की व्यवस्था एवं तैयारी में जिस उत्साह और समर्पण के साथ सहयोग किया, वह अत्यंत सराहनीय है.