लातेहार। दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाने वाले प्रवासी मजदूरों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए झारखंड सरकार की ओर से विभिन्न प्रावधान किए गए हैं. इसके तहत प्रवासी मजदूरों को मजदूरी, विस्थापन भत्ता, आने-जाने का किराया और यात्रा के दौरान व्यतीत समय की मजदूरी देने की व्यवस्था है. वहीं, दुर्घटना, अशक्तता और मृत्यु की स्थिति में निर्धारित शर्तों के अनुसार आर्थिक सहायता भी दी जाती है. प्रवासी मजदूरों को काम पर ले जाने के लिए एजेंट, सरदार या ठेकेदार के साथ जिस दिन समझौता या करार होता है, उसी दिन से मजदूरी देय होगी. इसके अतिरिक्त संबंधित संवेदक या एजेंट को आधे महीने की मजदूरी के बराबर विस्थापन भत्ता देना होगा. आने-जाने का किराया और यात्रा में व्यतीत समय की मजदूरी का भुगतान भी संबंधित संवेदक, एजेंट या मुख्य नियोजक को करना होगा. मजदूरी और अन्य भत्तों के भुगतान की पहली जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी, जबकि इसके बाद मुख्य नियोजक की जिम्मेदारी होगी. दूसरे राज्य में काम कराने के लिए मजदूरों को ले जाने वाले ठेकेदार को श्रम विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य है. प्रवासी श्रमिक की प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना में मृत्यु अथवा स्थायी पूर्ण अशक्तता होने पर पंजीकृत श्रमिक के आश्रितों को दो लाख रुपये और अपंजीकृत श्रमिक के आश्रितों को डेढ़ लाख रुपये की सहायता देने का प्रावधान है. दुर्घटना में दोनों आंखों या दो अंगों की हानि होने पर भी इसी दर से सहायता मिलेगी. वहीं, एक आंख या एक अंग की हानि होने पर पंजीकृत श्रमिक को एक लाख रुपये और अपंजीकृत श्रमिक को 75 हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है. सामान्य मृत्यु की स्थिति में मृतक के पार्थिव शरीर को पैतृक निवास तक लाने के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति का प्रावधान है. इसके अलावा मुख्यमंत्री झारखंड अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिक अनुदान योजना के तहत विदेश में प्रवास के दौरान असामयिक मृत्यु होने पर निर्धारित अर्हता पूरी करने वाले लाभुक के आश्रितों को पांच लाख रुपये की एकमुश्त सहायता दी जाती है.