लातेहार। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता पंकज तिवारी की संवेदनशीलता ने कुछ मासूमों का भविष्य अंधकार से बाहर निकाल दिया है. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सह समाजसेवी पंकज तिवारी के प्रयास से दलित बस्ती के उन बच्चों का स्कूल में नामांकन कराया गया है, जो कागजी औपचारिकताओं के फेर में शिक्षा से वंचित थे.
स्कूल के समय बाहर घूमते बच्चों ने खोली हकीकत
मामला लातेहार जिले के वार्ड नंबर 7 स्थित राजहार मोहल्ला की एक बस्ती का है. हाल ही में श्री तिवारी जब इस इलाके से गुजर रहे थे, तो उन्होंने स्कूल के समय कुछ बच्चों को बाहर घूमते-फिरते देखा. कौतूहलवश और बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए उन्होंने उनसे स्कूल न जाने का कारण पूछा. बच्चों ने बताया कि उनका विद्यालय में नामांकन ही नहीं हुआ है, इसलिए वे स्कूल नहीं जाते. इसके बाद उन्होने उनके अभिभावकों से मुलाकात की. अभिभावकों ने बताया कि बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं था, जिसके अभाव में उनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा था. आधार कार्ड नहीं था, इसलिए स्कूल प्रशासन उनका नामांकन करने से असमर्थता जता रहा था.
जिला प्रशासन ने दिखाई तत्परता
पंकज तिवारी ने इस गंभीर मुद्दे को तुरंत प्रमुखता से उठाया और लातेहार जिला प्रशासन से गुहार लगाई कि इन बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विशेष पहल की जाए. उन्होंने मांग की कि बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को सुलभ बनाया जाए, ताकि वे भी सामान्य बच्चों की तरह स्कूल जा सकें. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की. जिला शिक्षा पदाधिकारी गौतम साहू और जिला शिक्षा अधीक्षक ऋषिकेश के साथ शिक्षा विभाग की एक टीम तुरंत उस बस्ती में पहुंची. विभाग ने अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए प्रक्रियागत अड़चनों को दरकिनार कर पांच बच्चों का सीधा आश्रम विद्यालय, राजहार में नामांकन सुनिश्चित किया. उन्होने आयु के आधार पर अन्य 4-5 बच्चों का नामांकन आंगनवाड़ी केंद्र में कराने का निर्देश दिया.
कागजात बनवाने में भी मिलेगा पूरा सहयोग
सिर्फ नामांकन ही नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग ने यह भी आश्वस्त किया है कि इन बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में प्रशासन पूरा सहयोग करेगा, ताकि भविष्य में इन्हें किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े. कहना गलत नहीं होगा कि पंकज तिवारी की इस सकारात्मक सूझबूझ और जनहित की पहल की बदौलत आज वे मासूम बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं.