चंदवा
1948 की खरसांवा गोलीकांड के विरोध में चंदवा में मनाया गया काला दिवस


राजीव कुमार उरांव ने काला दिवस (खरसावां गोलीकांड) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहली जनवरी 1948 को झारखंड के खरसावां में गोलीकांड हुई हुई थी. हजारों की संख्या में आदिवासियों और मूलवासियों ने इस गोलीकांड में अपनी जाने गंवाई थी. यह गोलीकांड अंग्रेज सिपाहियों के द्वारा नहीं बल्कि यह घटना आजाद भारत के सिपाहियों के द्वारा खरसवां के रियासत को ओडिसा राज्य के विलय के विरोध में जमा हुए आदिवासियों के सीने में गोली मारी गई थी.
जिसमें हजारों हजार की संख्या में लोगों ने अपनी शहादत दी थी. शहीदों के शवों को घटनास्थल के नजदीक ही एक कुएं में डालकर भर दिया गया था कुछ शवों को जंगलों में फेंक दिया गया था. उन्होने कहा कि विडंबना की बात यह है कि उस घटना की पुलिस थाना में एफआईआर तक नहीं लिखी गई. जिस वजह से सही आंकड़ा तक न तो केंद्र सरकार और न ही ओडिसा सरकार के पास उपलब्ध है.
मौके पर राकेश लोहरा, तोष लोहरा, कुलेश्वर राम, राजेश भगत, दीपक गंझू, सुशील गंझू मनोज खरवार, अमर उरांव, दिनेश उरांव, भोला गंझू, सूरज भोगता, शिबू उरांव, श्याम उरांव, माधुरी उरांव, सबिता व राजेश टाना भगत समेत दर्जनों लोग उपस्थित थे.