


नवंबर के अंतिम सप्ताह से ही मसीही समाज में “एडवेंट काल” की शुरुआत हो चुकी है. यह काल प्रभु यीशु मसीह के आगमन की पवित्र तैयारी का समय माना जाता है. इसमें प्रार्थना, संयम और आत्मिक शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है. इधर, महुआडांड़ के बाजारों में भी क्रिसमस को लेकर जबरदस्त चहल-पहल देखी जा रही है. क्रिसमस ट्री, सजावटी सामान, सितारे, मोमबत्तियाँ और उपहारों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है.
महुआडांड़ प्रखंड में खासा उत्साह देखा जा रहा है. दुकानदारों के अनुसार, इस वर्ष क्रिसमस की खरीदारी में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे व्यापारियों में भी खुशी का माहौल है. क्रिसमस केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि प्रेम, शांति, भाईचारे और पारिवारिक एकता का प्रतीक भी है. इस अवसर पर लोग अपने रिश्तेदारों और मित्रों के साथ मिलकर खुशियाँ बाँटते हैं तथा उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं. जैसे-जैसे 25 दिसंबर नजदीक आ रही है, तैयारियाँ और भी तेज होती जा रही हैं. पूरा क्षेत्र क्रिसमस की रौशनी में जगमगाने लगा है. 