लातेहार। विश्व हिंदु परिषद के दुर्गा वाहिनी की प्रांत सह संयोजिका कीर्ति गौरव ने कहा कि दुर्गा वाहिनी को समझना आवश्यक है. यह एक अनुपम संगठन है और विश्व हिंदु परिषद की महिलाओं के द्वारा चलाया जाता है. उन्होने कहा कि दुर्गा हमारी मां है और दुर्गा शक्ति का रूप है. हमें शक्ति के रूप को उजागर करना है.
Advertisementशक्ति केवल शौर्य दिखाना नहीं है बल्कि अलग अलग दस रूप में दिखाना है, दुर्गा दसरूपा है. गौरव शहर के सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित आठ दिवसीय दुर्गावाहिनी की शौय प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे दिन संबोधित कर रही थी. उन्होने कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास में महिलाओं का भी योगदान है. सारी पीड़ाओं को सहते हुए नारी शक्ति का प्रदर्शन करती है.
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नारी के संस्कार से ही पुरूष महात्मा बुद्ध और भगत सिंह बनता है. श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में भी नारी शक्ति ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था. नारी अबला नहीं सबला है. यही कारण है कि विहिप ने महिलाओं के लिए एक संगठन बनाया. नारी को आत्म रक्षा के लिए तैयार करना होगा. सात मई 1987 को साध्वी ऋतंभरा को दुर्गा वाहिनी की पहली संयोजिका बनाया गया.
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दुर्गा वाहिनी 15 से 35 उम्र की महिलाओं का एक सशक्त संगठन है. समाज में व्याप्त महिषासुर से लड़ने के लिए दुर्गा वाहिनी की दुर्गाओं को प्रशिक्षित किया जाता है. उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया जाता है और यही शौय प्रशिक्षण है. मौके पर विहिप के जिला अध्यक्ष श्याम अग्रवाल, महामंत्री संजय तिवारी समेंत कई लोग मौजूद थे.