महुआडांड़ (लातेहार) लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड में लगातार हो रहे भालू के हमलों को देखते हुए वन विभाग ने लोगों को जागरूक करने का अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को अभियान के तीसरे दिन वन विभाग की टीम झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा से सटे महुआडांड़ प्रखंड के अंतिम एवं दुर्गम गांवों कुकुदपाठ, चिरोपाठ, जामडीह और पोखरडीह पहुंची। ये गांव महुआडांड़ मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित हैं। यह जागरूकता अभियान प्रभारी वनपाल गुरुदयाल सिंह के नेतृत्व में चलाया गया। अभियान में वन विभाग की पूरी टीम शामिल रही। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर भालू के व्यवहार, उसके संभावित ठिकानों तथा हमले से बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। अभियान के दौरान साउंड सिस्टम के माध्यम से भी लगातार जागरूकता संदेश प्रसारित किए गए। ग्रामीणों को जंगल जाने के दौरान सतर्क रहने, अकेले जंगल नहीं जाने, झाड़ियों वाले क्षेत्रों से बचने, समूह में चलने तथा भालू दिखाई देने पर घबराने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाकर शांत रहने की सलाह दी गई।प्रभारी वनपाल गुरुदयाल सिंह ने बताया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य भालू के हमलों को रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास है कि भालू हमले का एक भी नया मामला सामने न आए। इसी उद्देश्य से वन विभाग की टीम दिन-रात विभिन्न गांवों में पहुंचकर लोगों को जागरूक कर रही है। साउंड सिस्टम के माध्यम से भी लगातार बचाव संबंधी जानकारी दी जा रही है, ताकि ग्रामीण सतर्क रहें और किसी भी अप्रिय घटना से बच सकें।” उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि किसी क्षेत्र में भालू दिखाई दे या उसकी गतिविधि की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें। साथ ही, जंगल में महुआ, मशरूम, लकड़ी या अन्य वन उपज संग्रह करने जाने वाले लोग विशेष सावधानी बरतें। वन विभाग ने ग्रामीणों से सहयोग की अपील करते हुए कहा गया कि सावधानी और जागरूकता ही भालू हमलों की घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।