निहित कुमार लातेहार। सावन के महीने में जंगलों में स्वतः उगने वाला खुखड़ी (मशरूम की एक प्रजाति) गांव की महिलाओं के लिए जीवन यापन का प्रमुख साधन बन गया है. यह प्राकृतिक रूप से जमीन से उगने वाला मशरूम खासकर बरसात के मौसम में पाया जाता है और स्थानीय महिलाओं द्वारा जंगल से इकट्ठा कर बाजारों में बेचा जाता है. खुखड़ी की खासियत और स्वाद के कारण बाजार में इसकी काफी मांग में रहता है. स्थानीय बाजारों में इसकी कीमत 800 से 1000 रूपये प्रति किलो तक रहता है. यह न सिर्फ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि पारंपरिक जायका का स्वाद लोगों को दे रहा है. कांग्रेस नेता पंकज तिवारी व उप्र प्रमुख राजकुमार ने बताया कि अभी बाजार में 7000 से 800 रूपये के बीच खरीदारी की है.
उन्होंने कहा कि यह अपने स्वाद के लिए मशहूर है और महिलाओं के लिए जीवन यापन का एक बेहतरीन माध्यम है. यह प्रकृति पर निर्भर आजीविका की मिसाल भी पेश कर रहा है. ग्रामीण महिलाएं सुबह-सुबह जंगलों में जाकर खुकड़ी चुनती हैं और फिर स्थानीय बाजारों में इसकी बिक्री करती हैं. यह कार्य जोखिम भरा होने के बावजूद उन्हें एक अच्छा आर्थिक सहारा देता है. सरकार और स्थानीय प्रशासन यदि उचित प्रशिक्षण एवं बाजार व्यवस्था उपलब्ध कराए तो यह वन उत्पाद महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार का स्रोत बन सकता है.