


उल्लेखनीय है कि पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखण्ड नियमावली, 2025, 2 जनवरी 2026 से राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में लागू है. परिचर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि विवादों के बावजूद नियमावली में प्रशासनिक दृष्टि से ग्राम सभा को पंचायत के बजाय सर्वोपरि माना गया है तथा पारंपरिक व्यवस्था को मान्यता दी गई है. गाँव/टोला को स्वतंत्र सभा का अधिकार दिया गया है. ग्राम सभा की अध्यक्षता पारंपरिक प्रधान, किसी जनजातीय सदस्य या वरिष्ठ महिला द्वारा किए जाने का प्रावधान है. महिलाओं को विधि निर्माण में प्राथमिकता दी गई है. शासन व्यवस्था के अनेक अधिकार डीसी, सीओ, मुखिया व प्रमुख से स्थानांतरित होकर ग्राम सभा को प्राप्त हुए हैं. ग्राम सभा को अपना सचिवालय स्थापित करने तथा सहायक सचिव की नियुक्ति की स्वीकृति भी दी गई है. कार्यक्रम में ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष कॉर्नेलियुस मिंज, सचिव मार्शेल बेक, कोषाध्यक्ष अगस्टूस मिंज तथा केन्द्रीय जन संघर्ष समिति के जेरोम जेराल्ड कुजूर, कुलदीप मिंज, जयमन्ती बाड़ा और अमला किंडो की महत्वपूर्ण भूमिका रही. परिचर्चा में 56 गांवों के ग्राम प्रधानों ने सहभागिता की.