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महुआडांड़राज्‍य

पेसा कानून व झारखंंड नियमावली पर एकदिवसीय परिचर्चा का आयोजन

परिचर्चा में 56 गांवों के ग्राम प्रधानों ने सहभागिता की

महुआडाँड़(लातेहार)। पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) तथा पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखण्ड नियमावली, 2025 को लेकर महुआडाँड़ स्थित सरना भवन में एकदिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन ग्राम प्रधान संघ, महुआडाँड़ एवं केन्द्रीय जन संघर्ष समिति द्वारा किया गया. परिचर्चा में वक्ता अशोक खलखो ने कहा कि झारखण्ड नियमावली 2025 निर्वाचित मुखिया (जिनके पास वित्तीय अधिकार हैं) और पारंपरिक ग्राम सभा व ग्राम प्रधानों के बीच संभावित शक्ति-संघर्ष का प्रमुख कारण बन सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी महकमे अपनी शक्तियाँ छोड़ने में विरोध करेंगे, जिससे कानूनी अड़चनें उत्पन्न होना स्वाभाविक है. ग्राम सभा द्वारा लिए गए निर्णयों, योजनाओं एवं विधियों के लिए उपायुक्त द्वारा सत्यापन की व्यवस्था ग्राम सभा की स्वायत्तता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. श्री खलखो ने कहा कि नियमावलियों में संशोधन की प्रक्रिया सतत चलती रहती है, अतः आवश्यक संशोधनों के लिए सरकार पर दबाव बनाना होगा. पेसा अधिनियम, 1996 के मूल अधिकारों की पूर्ण प्राप्ति के लिए संगठित संघर्ष की आवश्यकता है. उल्लेखनीय है कि पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखण्ड नियमावली, 2025, 2 जनवरी 2026 से राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में लागू है. परिचर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि विवादों के बावजूद नियमावली में प्रशासनिक दृष्टि से ग्राम सभा को पंचायत के बजाय सर्वोपरि माना गया है तथा पारंपरिक व्यवस्था को मान्यता दी गई है. गाँव/टोला को स्वतंत्र सभा का अधिकार दिया गया है. ग्राम सभा की अध्यक्षता पारंपरिक प्रधान, किसी जनजातीय सदस्य या वरिष्ठ महिला द्वारा किए जाने का प्रावधान है.  महिलाओं को विधि निर्माण में प्राथमिकता दी गई है. शासन व्यवस्था के अनेक अधिकार डीसी, सीओ, मुखिया व प्रमुख से स्थानांतरित होकर ग्राम सभा को प्राप्त हुए हैं. ग्राम सभा को अपना सचिवालय स्थापित करने तथा सहायक सचिव की नियुक्ति की स्वीकृति भी दी गई है. कार्यक्रम में ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष कॉर्नेलियुस मिंज, सचिव मार्शेल बेक, कोषाध्यक्ष अगस्टूस मिंज तथा केन्द्रीय जन संघर्ष समिति के जेरोम जेराल्ड कुजूर, कुलदीप मिंज, जयमन्ती बाड़ा और अमला किंडो की महत्वपूर्ण भूमिका रही. परिचर्चा में 56 गांवों के ग्राम प्रधानों ने सहभागिता की.

Md Ali Raja

संवाददाता, महुआडांड, लातेहार

Md Ali Raja

संवाददाता, महुआडांड, लातेहार

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