लातेहार। झारखण्ड उच्च न्यायालय के 29 जुलाई 2024 के आदेश के बावजूद राज्य सरकार द्वारा संसद के अधिनियम पंचायतों के उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा/पीपीईएसए) के अनुरूप स्वतंत्र नियमावली नहीं बनाए जाने के विरोध में रविवार को लातेहार समाहरणालय गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया गया। यह विरोध आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के आह्वान पर आयोजित हुआ, जिसमें आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने झारखण्ड सरकार द्वारा झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम 2001 की धारा 3 के तहत लागू की गई पेसा नियमावली को असंवैधानिक और संसद द्वारा पारित कानून के विरुद्ध बताया। मंच का आरोप है कि सरकार ने ग्राम सभा को केंद्र में रखने के बजाय उपायुक्त-केंद्रित व्यवस्था लागू कर दी है, जो अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, स्वशासन और प्राकृतिक संसाधनों पर सीधा हमला है।
आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के वक्ताओं ने कहा कि पेसा अधिनियम का मूल उद्देश्य ग्राम सभा को सर्वोच्च इकाई बनाकर आदिवासी समाज को स्वशासन का अधिकार देना है, लेकिन राज्य सरकार सामान्य पंचायत और नगरपालिका व्यवस्था को जबरन लागू कर आदिवासी स्वायत्तता को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। यह न केवल संविधान की भावना के खिलाफ है, बल्कि आदिवासी समाज के संघर्षों और बलिदानों का भी अपमान है। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पंचायत राज मंत्री दीपिका पाण्डेय, संबंधित वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह, लातेहार विधायक प्रकाश राम तथा पेसा नियमावली से जुड़े जनप्रतिनिधियों के पुतले दहन कर आक्रोश व्यक्त किया गया।
मंच के प्रमुख आर्यन उरांव ने कहा कि झारखण्ड सरकार अविलंब संसद द्वारा पारित PPESA 1996 के अनुरूप स्वतंत्र, स्पष्ट और ग्राम सभा-केंद्रित संचालन नियमावली बनाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को राज्यव्यापी और और अधिक उग्र किया जाएगा। इस प्रदर्शन में फूलदेव लोहरा, वासदेव लोहरा, प्रेम गंझू, महावीर गंझू सहित आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के सैकड़ों सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में पेसा कानून के पूर्ण और सही क्रियान्वयन की मांग की।