बरवाडीह (लातेहार)। प्रखंड के चुंगरू पंचायत स्थित राजकीयकृत माध्यमिक विद्यालय, नावाडीह को हाई स्कूल का दर्जा मिले एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विद्यालय आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है. हाई स्कूल में अपग्रेड होने के बावजूद यहां न पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं, न नया भवन बनाया गया है और न ही आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों की व्यवस्था हो सकी है. इसका खामियाजा सीधे तौर पर यहां पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है. विद्यालय में कक्षा 1 से 10 तक कुल 319 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. इनमें कक्षा 9 और 10 में 50-50 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. इतने बड़े छात्र संख्या के बावजूद विद्यालय में वर्तमान में केवल प्रधानाध्यापक कन्हाई राम, शिक्षक रामनाथ राम, सुजीत कुमार तथा आप पारा शिक्षक अखिलेश्वर प्रजापति ही कार्यरत हैं. शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार विषयवार गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए यहां कम से कम 11 शिक्षकों की आवश्यकता है. शिक्षकों की भारी कमी के कारण कई विषयों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है. विद्यालय का संचालन आज भी पुराने भवन में किया जा रहा है. हाई स्कूल बनने के बाद भी नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है. परिसर में चहारदीवारी नहीं होने से विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। वहीं सबसे गंभीर समस्या फर्नीचर की है. पर्याप्त बेंच-डेस्क नहीं होने के कारण अधिकांश छात्र-छात्राएं आज भी जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है. विद्यालय को अब तक मरम्मत एवं विकास मद की राशि भी उपलब्ध नहीं कराई गई है. जबकि क्षेत्र के अन्य हाई स्कूलों को इस मद में राशि आवंटित की जा चुकी है. संसाधनों की कमी के कारण विद्यालय के विकास कार्य भी ठप पड़े हुए हैं. स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि हाई स्कूल का दर्जा मिलने से उन्हें बच्चों की बेहतर शिक्षा की उम्मीद जगी थी, लेकिन एक वर्ष बाद भी विद्यालय की स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ. उनका आरोप है कि संसाधनों के अभाव में बच्चों के भविष्य के साथ समझौता किया जा रहा है. अभिभावकों ने राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यालय में शीघ्र नए भवन का निर्माण, पर्याप्त विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति, बेंच-डेस्क की उपलब्धता, चहारदीवारी का निर्माण तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.