बालुमाथ
तरक्की की रौशनी से वंचित बस्तियों में पहुंचा खाकी का कारवां


जहां आदिम जनजाति बिरहोर परिवार रहते हैं. जब देश अपने गणतंत्र की 77वीं वर्षगांठ राष्ट्रीय त्यौहार के रूप में मना रही है, तो ऐसे में इन बातों से अनभिज्ञ अचानक वर्दीधारियों को देख बड़े बूढ़े तो क्या बच्चे भी कुछ पल के लिए सहम गए. लेकिन पुलिस का मानवीय पहल का परचम उठाए नौजवान सब इंस्पेक्टरों ने उन आदिम जनजाति परिवार से ताल्लुक रखने वाले बच्चों को इकट्ठा कर देश की गणतंत्र दिवस की खुशियों के सौगात के रूप में देश की आन बान और शान का प्रतीक तिरंगे को बच्चों के हाथों में टॉफी बिस्किट और चॉकलेट के साथ पकड़ाए तो बच्चे क्या बड़े बुजुर्गों के चेहरे भी आत्मीयता से सराबोर हो खिल गए.
बच्चे राष्ट्रीय त्यौहार के मौके पर तिरंगे के साथ मिले इस तोहफे को दिल से लगाकर खुश हो गए. इस मौके को यादगार बनाने के लिए मन ही मन बच्चे टोली में शामिल सब इंस्पेक्टरों को दिल ही दिल शुक्रिया करने लगे. टोली में शामिल सब इंस्पेक्टरों में देवेंद्र कुमार, गौतम कुमार, अमित कुमार रविदास, धीरज कुमार समेत कई लोग इस मौके के साक्षी बने.