लातेहार। कहना गलत नहीं होगा कि लातेहार जिला की खुबसूरती बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींचती है. एक ओर नेतरहाट की खुशनुमा आबोहवा और दिलकश वादियां लोगों को लुभाती है तो दूसरी ओर बेतला नेशनल पार्क में स्वच्छंद घुमते जंगली जानवरों को देखना एक सुखद अनुभव होता है. लोध फॉल में उच्चाई से गिरती जलधारा को देख कर सैलानियों के मुंह से बरबस ही प्रंशसा के बोल फूूट पड़ते हैं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ ये ही पयर्टन स्थल लातेहार में हैं. इसके अलावा भी लातेहार में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैंं जो काफी रमणीक हैं, लेकिन उन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जा सकता है. इन सबके बीच एक ऐसा नाम है जो गुमनाम पर्यटन स्थलों मे पर्यटकों को ले कर जाते हैं और उनके ट्रीप को यादगार बनाते हैं.
गोविंद पाठक
वह हैं गोविंद पाठक. गोविंद पाठक प्रारंभ से ही लातेहार के पर्यटन स्थलों को सबों के सामने लाने का भरसक प्रयास करते रहे हैं. उनकी इस रूची को देख कर ही तत्कालीन उपायुक्त राजीव कुमार ने गोविंद पाठक को लातेहार का टूरिज्म रिर्सोस पर्सन के रूप में नामित किया था. गोविंद पाठक ने लातेहार टूरिज्म (Latehar Tourism ) नामक एक टूरिस्ट एजेंसी का संचालन करते हैं. यह पर्यटकों को न सिर्फ लातेहार वरन झारखंड के अन्य पर्यटन स्थलों में घुमने से ले कर ठहरने व खाने तक की सुविधायें पर्यटकों को न्यूनतम दर पर उपलब्ध कराते हैं.
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गोविंद पाठक ने अब एक अनोखी पहल शुरू की है. शुभम संवाद.कॉम से बातचीत करते हुए गोविंद पाठक ने बताया कि बंगाल, बिहार, झारखंड समेंत अन्य प्रदेशों के लोग लातेहार में नेतरहाट और बेतला आदि जगहों में घुमने आते हैं. उन्होने बताया कि उनकी एजेंसी से आने वाले लोगों को उनकी ट्रीप को यादगार बनाने के लिए उन्होने पर्यटकों को स्मृति चिन्ह के रूप में सोहराई पेंटिंग देने की शुरूआत की है. पर्यटकों को गोविंद पाठक के ये गिफ्ट बहुत लुभा रहे हैं.
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क्या कहते हैं गोविंद पाठक
शुभम संवाद.कॉम से बात करते हुए पाठक ने कहा कि दझारखंड की समृद्ध कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Latehar Tourism ने झारखंड के पारंपरिक सोहराई आर्ट की पेंटिंग उपहार देने की योजना बनायी है. उन्होने बताया कि अभी हाल ही में कोलकाता से आये पर्यटकों ने उन्होने यह गिफ्ट दी. इसे Ranchi के प्रसिद्ध कलाकार धनंजय के द्वारा बनाया गया है. यह पेंटिंग न केवल झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है, बल्कि पर्यटकों के बीच राज्य की कला को लोकप्रिय बनाने का एक अनूठा प्रयास भी है.
सोहराई कला की विशेषता
सोहराई कला झारखंड की एक पारंपरिक आदिवासी चित्रकला है, जो विशेष रूप से त्योहारों और सांस्कृतिक अवसरों पर बनाई जाती है। यह कला मुख्य रूप से मिट्टी की दीवारों पर प्राकृतिक रंगों और सरल रेखाओं के माध्यम से पशु, पक्षी, प्रकृति और सांस्कृतिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती है। धनंजय जी, जो वर्षों से इस कला के संरक्षक रहे हैं, ने Latehar Tourism के इस पहल में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी बनाई गई पेंटिंग में सोहराई कला की गहराई और सौंदर्य स्पष्ट रूप से झलकता है.
पर्यटकों की प्रतिक्रिया
कोलकाता से आए पर्यटकों ने Latehar Tourism के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि यह उपहार उनके लिए एक यादगार अनुभव है. उन्होंने कहा, “झारखंड की कला और संस्कृति को इस तरह के प्रयासों से नई पहचान मिलेगी. धनंजय जी की कला में झारखंड की मिट्टी की खुशबू और सांस्कृतिक धरोहर का अद्भुत सम्मिश्रण है.
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Latehar Tourism का उद्देश्य
गोविंद पाठक ने कहा कि Latehar Tourism झारखंड के पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर को देश-विदेश में प्रचारित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है. इस पहल का उद्देश्य न केवल पर्यटकों को झारखंड की कला से परिचित कराना है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और उनकी कला को प्रोत्साहित करना भी है.