लातेहर। किसानों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को चंदवा उप डांकघर से पत्र भेजकर ईच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है. किसानों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए हस्ताक्षरयुक्त पत्र में कहा है कि टोरी – चंदवा कंस्ट्रक्शन ऑफ आरओबी at km 116, NH – 99 (new – 22) at चंदवा LC NO. 12A/T] in the state of jharkhand on EPC mode job NO. NH -99 – (new NH – 22) -jHR – 2020-21/287. वर्क है. टोरी रेलवे क्रॉसिंग जाम समस्या से हम किसान काफी पिड़ित हैं, तंग आ चुके है. यह समस्या ला- ईलाज हो गया है. जनहित से जुड़ी इस मामले पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री, केंद्र सरकार और झारखंड सरकार तथा एनएच विभाग लापरवाह बना हुआ है. 03 अप्रैल 2021 को उक्त टोरी – चंदवा फ्लाई ओवरब्रिज की निर्माण के लिए शिलान्यास किया गया था, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हांथों, अब तक करीब सात बार टेंडर निकल चुका है. इसके निर्माण के लिए बजट बढ़कर अब करीब 119 करोड़ राशि हो गई है जिसका अब तक टेंडर नहीं होना सरकार की उदासीनता को दर्शाता है. टोरी रेलवे क्रॉसिंग 24 घंटे बंद रहती है, हर बार किसी न किसी जिंदगी को खतरे में डालती है. एनएच 99 न्यु 22 अस्पताल, थाना, ब्लॉक, शहर को जोड़ती है, हर घंटे लंबा जाम, घंटों बंद गेट और जाम में फंसकर लाचार बनकर किसी दर्द पीड़ा की तरह छटपटाते रहते हैं, जाम में फंसे एम्बुलेंस में बैठे बीमार व्यक्ति की जिंदगी और मौत को तय करती है रेलवे फाटक, घंटों फाटक बंद रहने से बीमार मरीज की मौत फाटक पर ही हो जा रही है, क्रॉसिंग जाम में फंसकर महिलाओं का प्रसव फाटक पर ही हो जाती है अस्पताल पहुंच नहीं पाते, रेलवे क्रॉसिंग से ही उन्हें कफन ओढ़ाकर घर वापस लजाना पड़ता है,. फाटक जाम से कई परिवारों की जिंदगियां खत्म हो चुकी है, घर से निकलते ही रेलवे क्रॉसिंग जाम की कैद में आ जाते हैं हजारों लोग, जाम में फंसे मरीजों के दम तोड़ने की खबरें अब आम हो गई है. हर घड़ी यहां ट्रेन गुजरती है और कभी – कभी एक साथ जोड़कर 3 -4 ट्रेन गाड़ियां परिचालन करती है. इससे घंटों जाम में फंसना पड़ता है, जाम में फंसकर लोगों का एक – एक घंटा समय बर्बाद हो रहा है, रेलवे क्रॉसिंग जाम से जनता त्राहि – त्राहि कर रही है, कई दशकों से यहां हादसे हो रहे हैं, लोग ट्रेन की चपेट में भी आए हैं, क्रॉसिंग जाम से हमारी जिंदगी तबाह हो रही है, हम अपनी जिंदगी जी नहीं रहे. पत्र में क्रॉसिंग जाम की त्रासदी व असहनीय पीड़ा से मुक्ति के लिए इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की आग्रह की गई है. इच्छा मृत्यु मांगने वाले किसानों में अयुब खान, सुरेंद्र सिंह, बैजनाथ ठाकुर, रसीद मियां,पचु गंझु, शोभन उरांव, निरंजन ठाकुर, दसवा परहैया, राजू कुमार साव, हनुक लकड़ा, साजीद खान, रवि शंकर गंझु, राजेश कुमार साव, जिदन टोपनो, माईकल हंश, सनीका मु़डा, बुधराम बारला, मुन्ना मुंडा, अर्जुन होरो, सिमॉन भेंगरा, बोने मुंडा, महेंद्र गंझु, अमीत भेंगरा, सुलेंन्दर भोगता, गुजरा गंझु, थोमस टोपनो, रवि उरांव शामिल हैं.