महुआडांड़ (लातेहार)। महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत चीरोपाठ ग्राम के निवासी तिलकु नगेसिया 40 वर्ष, पिता दर्शन नगेसिया, रविवार सुबह दो जंगली भालुओं के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों की तत्परता से उनकी जान बच सकी। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें रेफर कर दिया।जानकारी के अनुसार रविवार सुबह करीब छह बजे सुबह तिलकु नगेसिया अपने खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान डोंगापानी नामक स्थान पर झाड़ियों से अचानक दो भालू निकल आए और उन पर हमला कर दिया। दोनों भालुओं ने मिलकर उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया, जिससे वे जमीन पर गिर पड़े। घायल युवक के शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और हल्ला कर किसी तरह भालुओं को जंगल की ओर खदेड़ा। इसके बाद ग्रामीणों ने बिना देर किए घायल को महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।अस्पताल में चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन शरीर पर गंभीर चोटें होने के कारण बेहतर इलाज के लिए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही महुआडांड़ वन विभाग के प्रभारी वनपाल गुरुदयाल सिंह अपनी टीम के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उन्होंने घायल की स्थिति का जायजा लिया तथा वन्यजीव हमले में तत्काल राहत के तहत घायल के परिजनों को 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की। साथ ही आश्वासन दिया कि जांच एवं आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद विभागीय प्रावधानों के अनुसार अतिरिक्त मुआवजा भी उपलब्ध कराया जाएगा। प्रभारी वनपाल गुरुदयाल सिंह ने बताया कि क्षेत्र में लगातार भालुओं की गतिविधियां बढ़ी हैं। इसे देखते हुए वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सुबह भोर, शाम और रात के समय अकेले जंगल या खेत की ओर न जाएं, बल्कि समूह बनाकर ही निकलें। साथ ही झाड़ियों वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतें।उन्होंने बताया कि वन विभाग की टीम गांव-गांव जाकर वाहन में साउंड बॉक्स के माध्यम से लोगों को भालू से बचाव के उपायों की जानकारी दे रही है, ताकि वन्यजीव हमलों की घटनाओं को रोका जा सके और ग्रामीण सुरक्षित रह सकें।इस जागरूकता अभियान में प्रभारी वनपाल गुरुदयाल सिंह के साथ वनरक्षी सुनील उरांव एवं वनरक्षी राजेश उरांव सक्रिय रूप से शामिल हैं। लगातार हो रही भालू हमले की घटनाओं को देखते हुए ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाने और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है।