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रेल कैंपस में गंदगी फैलाने वाले दुकानदारों पर ईओडब्ल्यू सख्त, सात दिनों का अल्टीमेटम

मांस दुकानों से निकलने वाला कचरा बना दुर्गंध का बड़ा कारण, सुभाष चौक से बीएसएनएल टावर तक कचरे का अंबार; छठ महापर्व से पहले सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

बरवाडीह (लातेहार)। रेल कैंपस क्षेत्र में गंदगी फैलाने वाले दुकानदारों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने सख्त रुख अपनाया है. सड़क किनारे कचरा फेंककर गंदगी फैलाने वाले सभी दुकानदारों को सात दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है. स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय के भीतर दुकानदारों ने कचरा फैलाना बंद नहीं किया और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है. ईओडब्ल्यू के अनुसार, रेल कैंपस में सबसे अधिक गंदगी मांस बेचने वाले दुकानदारों द्वारा फैलाई जा रही है. दुकानों से निकलने वाले मांस के अवशेष और अन्य कचरे को खुले में सड़क किनारे फेंक दिया जाता है, जिससे पूरे इलाके में असहनीय दुर्गंध फैल रही है. बाजार से सुभाष चौक तथा बीएसएनएल टावर से रेलवे स्टेशन जाने वाले रास्ते पर कचरे का अंबार लगा हुआ है. स्थिति यह है कि राहगीरों और आसपास के लोगों को इस रास्ते से गुजरने में भी परेशानी हो रही है. सबसे गंभीर सवाल यह है कि लोक आस्था के महापर्व छठ से ठीक पहले शहर की यह तस्वीर सामने आ रही है. एक ओर विभिन्न मोहल्लों के लोग छठ घाटों और सड़कों की साफ-सफाई में जुटने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ दुकानदारों की लापरवाही से सार्वजनिक रास्तों को कूड़ाघर में तब्दील किया जा रहा है. छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं को स्वच्छ रास्ता उपलब्ध कराने की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों की इस गंभीर समस्या पर चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है. आखिर सवाल यह है कि जब छठ महापर्व पर पूरा शहर स्वच्छता और पवित्रता की तैयारी में जुटता है, तो सार्वजनिक सड़कों पर दिनभर कचरा फेंकने वालों पर पहले से सख्ती क्यों नहीं की जाती? क्या बाजार की सफाई केवल आम लोगों और मोहल्ले के युवाओं की जिम्मेदारी है? दुकानदारों को भी यह समझना होगा कि दुकान चलाने का अधिकार है, लेकिन उसके नाम पर सार्वजनिक सड़क और आसपास के वातावरण को गंदा करने का अधिकार किसी को नहीं है. अब देखना होगा कि ईओडब्ल्यू के सात दिनों के अल्टीमेटम का दुकानदार कितना पालन करते हैं और छठ महापर्व से पहले रेल कैंपस को गंदगी तथा दुर्गंध से मुक्ति मिल पाती है या नहीं.

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल

रेल कैंपस में लगातार बढ़ रही गंदगी और दुर्गंध के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आना चिंता का विषय है. खासकर जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर से लोगों को उम्मीद है कि वे इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेकर संबंधित विभाग और दुकानदारों के साथ समन्वय स्थापित करेंगी तथा नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए पहल करेंगी. छठ जैसे लोक आस्था के महापर्व से पहले आम लोगों, श्रद्धालुओं और छठ व्रतियों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता होनी चाहिए. वहीं जिप सदस्य संतोषी शेखर ने कहा कि इस मामले में धनबाद डीआरएम से बात हुई है जल जल्द ही इस पर आरवाई और –साफ सफाई होगी.

व्यवसाई समाज के अध्यक्ष ने कहा

व्यवसायिक संघ के अध्यक्ष दीपक राज से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दुकानों के आसपास गंदगी फैलाना बिल्कुल गलत है. उन्होंने सभी दुकानदारों से अपील करते हुए कहा कि वे कचरे को इधर-उधर न फेंकें, बल्कि उसे एक निर्धारित स्थान पर एकत्रित कर उचित तरीके से निस्तारित करें. उन्होंने कहा कि बाजार को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. इसके लिए प्रत्येक दुकानदार को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए.

श्यामली शर्मा ने कहा स्वच्छता किसी एक की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी

समाजसेवी श्यामली शर्मा ने कहा कि छठ महापर्व केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और पवित्रता का प्रतीक है. ऐसे पावन अवसर पर अगर शहर की सड़कें मांस के अवशेष और गंदगी से पटी रहें, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. दुकानदारों को यह समझना चाहिए कि उनकी दुकान से निकलने वाला कचरा सिर्फ सड़क को गंदा नहीं करता, बल्कि किसी दूसरे के स्वास्थ्य, सम्मान और धार्मिक भावनाओं को भी प्रभावित करता है. उन्होंने कहा कि जिस सड़क से छठी मैया के व्रती नंगे पांव होकर गुजरेंगे, उसी रास्ते पर अगर गंदगी और दुर्गंध का अंबार लगा हो, तो इससे बड़ी विडंबना क्या होगी? आस्था का सम्मान केवल पूजा करने से नहीं, बल्कि अपने आसपास की स्वच्छता बनाए रखने से भी होता है. उन्होंने जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से भी इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की अपील की. साथ ही दुकानदारों से आग्रह किया कि वे अपनी जिम्मेदारी समझें और कचरे का उचित निस्तारण करें, ताकि बरवाडीह की पहचान गंदगी से नहीं, बल्कि स्वच्छता और सामाजिक एकता से बने.

Mayank Wishwkarma

संवाददाता, शुभम संवाद, बरवाडीह (लातेहार)

Mayank Wishwkarma

संवाददाता, शुभम संवाद, बरवाडीह (लातेहार)

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