बालूमाथ (लातेहार)। प्रखंड क्षेत्र में सीसीएल द्वारा संचालित तेतरियाखांड कोलियरी में कोयला उठाव को लेकर गतिरोध लगातार जारी है. बताया जा रहा है, कि सीसीएल द्वारा जारी टेंडर के तहत पीएनएम कंपनी को कोयला उठाव का कार्य मिला है. जिसमें कोयला हाईवा के माध्यम से बालूमाथ साइडिंग तक पहुंचाया जाना है. पीएनएम कंपनी का प्रतिनिधितत्व कर रहे स्थानीय लिफ्टर ने बताया कि कोलियरी में लगभग 13 लाख टन कोयले का स्टॉक जमा हो गया है. उनका कहना है, कि डीओ होल्डरों द्वारा अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला पहले ही उठा लिया गया, जबकि बचा हुआ कोयला लंबे समय से पड़ा है. इस दौरान कई स्थानों पर कोयले में आग लग गई है, जिससे लगातार जहरीली गैस और धुआं निकल रहा है. इसके कारण आसपास के ग्रामीण प्रदूषण की चपेट में आ रहे हैं. जिससे बीमार पड़ने की शिकायत कर रहे हैं. जिससे सरकार को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है. वहीं दूसरी ओर कई ट्रक मालिक हाईवा से कोयला ढुलाई का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि पिछले 32 वर्षों में इस क्षेत्र में कभी हाईवा से कोयला परिवहन नहीं हुआ है. ऐसे में परंपरागत ट्रक से ही कोयला उठाव कराया जाना चाहिए. ट्रक मालिकों ने चेतावनी दी है, कि उनकी मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन किया जाएगा. कोलियरी क्षेत्र में जारी इस विवाद के कारण कोयला उठाव पूरी तरह प्रभावित हो रहा है. मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन एवं सीसीएल प्रबंधन की भूमिका पर भी लोगों को गले का फांस बनी हुई है. पीएनएम कंपनी संचालक ने कहा की कोयला उठाव नही होने के कारण तेतरियाखांड कोलियरी के कोयला स्टाक मे करीब आठ माह पूर्व से आग लगी हुई है. जिसे पीएनएम कंपनी सीसीएल के सहयोग से लगातार बुझाने की काम कर रही है. कंपनी संचालक को ग्रामीणों से कोई शिकवा शिकायत नहीं है. पर तेतरियाखांड़ कोलियरी मे कुछ लोगों के द्वारा अपने नीजी स्वार्थ के लिए ग्रामीणों को उलझाए रखने के लिए आंदोलन किये जाते रहे हैं. पीएनएम कंपनी संचालक ने यह भी कहा कि पीएनएम द्वारा शीघ्र ही तेतरियाखांड़ कोलियरी क्षेत्र में आने वाले बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की विभिन्न योजनाएं बनाएं गए हैं. जिसका भी पीएनएम कंपनी हर ऐंगल से सर्वे करा लिया है. उधर तेतरियांखांड़ कोलियरी के परियोजना पदाधिकारी ने कोलियरी के विभिन्न समस्याओं से अवगत कराते हुए बताया कि तेतरियांखांड़ कोलियरी में लगभग 13 लाख टन कोयला छह माह पूर्व उत्पादन कर स्टॉक जमा हो गया है. उनका कहना है, कि डीओ होल्डरों द्वारा अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला पहले ही उठा लिया गया. जबकि बचा हुआ 13 लाख टन कोयला लंबे समय से पड़ा हुआ करीब छह माह से धुधु कर जल रहा है. इस दौरान कई स्थानों पर कोयले में भी भीषण आग लग गई है. जिससे लगातार जहरीली गैस और धुआं निकल रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि अगर समय रहते उक्त 13 लाख टन कोयला उठाव नही किया जाता है, तो सीसीएल को 100 करोड़ रुपए राजस्व का घाटा होगा.