


लातेहार। सरना समिति, बालुमाथ के प्रखंड सचिव शंकर उरांव ने एनटीपीसी पर पारंपरिक खेती की जमीन को हथियाने के उद्देश्य से प्रस्तावित ग्रामसभाओं को रद्द करने की मांग की है. एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होने कहा कि बालूमाथ प्रखंड क्षेत्र के गेरेंजा,बिशुनपुर व भैंसादोन में 14 से 16 दिसंबर के बीच अनापत्ति लेने के लिए एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के द्वारा पुश्तैनी दखल कब्जा वाली खेती योग्य जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है. जबकि जमीन कई पीढ़ियों से उनकी मुख्तियारगिरी में रही है.
सरना समिति के सचिव शंकर उरांव का कहना है कि पुराने सर्वे में हुई गड़बड़ी के कारण उनलोगों की जमीन खतियान में जंगल-झाड़ या बिहार सरकार के नाम दर्ज हो गया है. जिसका फायदा उठाकर कंपनी अब ग्राम सभाओं के माध्यम से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने में जुटी है. उन्होंने कहा कि वे लोग जमीन पर वर्षों से खेती कर रहे हैं. टैक्स जमा करते आए हैं, और खेतों पर उनका शांतिपूर्ण कब्जा है. ऐसे में बिना जांच पड़ताल के कंपनी द्वारा उन्हें बेदखल करने की कोशिश की जा रही है. शंकर उरांव का कहना है कि फॉरेस्ट राईट एक्ट के तहत वन अधिकार मान्यता का पूरा हक ग्रामीणों को है. लेकिन उसके बजाय कंपनी ग्राम सभा में जल्दबाज़ी में एनओसी लेना चाह रही है.
शंकर उरांव ने ग्रामीण एकजुट होकर अपने भूमि अधिकारों की लड़ाई मजबूत तरीके से उठाने की अपील की है. ग्रामीणों ने प्रशासन से पुराने सर्वे में हुई गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच कराने, पुश्तैनी खेती योग्य जमीन को सही खतियान में बहाल करने और बिना उचित प्रक्रिया और जांच के किसी भी ग्राम सभा में एनओसी लेने की कोशिश रोकने की मांग की है. कहा कि किसी भी स्थिति में एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड को जमीन नहीं दिया जाएगा. खनन करने वाली कंपनी विकास के नाम पर आती हैं, और रैयतों के अधिकार को लुट और कुचलकर बिना नौकरी मुआवजा दिए चली जाती है.