लातेहार। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सोनाल शांति ने देश में परीक्षाओं की बदहाली, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की है. स्थानीय परिषदन भवन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होने कहा कि साल 2014 से 2024 के बीच देश में लगभग 89 पेपर लीक के मामले सामने आए, जिसके कारण 48 बार दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ीं. सोनाल शांति ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 में तीन से 10 साल की कैद और 10 लाख से एक करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का नियम है.
इसके बावजूद राजस्थान समेत कई राज्यों में पेपर लीक नहीं रुके, जो यह दर्शाता है कि सिर्फ कानून बना देने से जमीन पर बदलाव नहीं आया. शांति ने कहा कि सिर्फ चार बड़ी परीक्षाओं में हुई धांधली के कारण एक करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं. सोनाल शांति ने कहा कि एक मार्च 2023 तक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 9,64,359 पद खाली पड़े थे. एक जुलाई 2024 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भी 84,106 वैकेंसियां थी. रेलवे भर्ती की बात करें तो 2004-14 के बीच जहां 4.11 लाख भर्तियां हुई. 2014-24 के बीच यह आंकड़ा मामूली बढ़त के साथ सिर्फ 5.02 लाख तक पहुंच सका, जबकि नौकरी चाहने वाले आवेदकों की संख्या इस दौरान करोड़ों में पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा कि माध्यमिक या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त युवाओं में बेरोजगारी दर 6.5 प्रतिशत है. आज देश में सबसे ज्यादा बेरोजगार वही हैं जो उच्च शिक्षित स्नातक और स्नातकोतर हैं. सोनाल शांति ने कहा कि सिस्टम की इस नाकामी की सबसे दर्दनाक कीमत देश के छात्र अपनी जान देकर चुका रहे हैं. वर्ष 2022 में देश के कुल सुसाइड केसों में से 7.6 प्रतिशत यानी लगभग 13,000 स्टूडेंट छात्रों के थे. सितंबर 2025 में जारी 2023 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा और भी भयावह होकर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. कोटा, त्रिशूर और चेन्नई जैसे प्रमुख कोचिंग सेंटरों में छात्रों की आत्महत्याओं के क्लस्टर देखे जा रहे हैं. मौके पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष कामेश्वर यादव समेंत अन्य कांग्रेस नेता मौजूद थे.