सोमवार को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कर्नाटक, तमिलनाडु, सिक्किम समेत कई राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की. जैसे ही उड़ीसा के राज्यपाल के रूप में चंदवा के लाल बृजमोहन राम की नियुक्ति की खबर फैली. चंदवा, लातेहार, पलामू प्रमंडल समेत झारखंड राज्य के आम अवाम में खुशी की लहर दौड़ गई. वजह साफ थी. सूची में उड़ीसा जैसे राज्य के राज्यपाल के रूप में लातेहार के पूर्व विधायक व पलामू संसदीय क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व करने वाले चंदवा के धरती पुत्र बृजमोहन राम की नियुक्ति. बृजमोहन राम के अब तक के राजनैतिक सफर पर नज़र डालें तो इसकी शुरुआत 1990 में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव के बाद हुई थी. इस चुनाव में लातेहार विधानसभा क्षेत्र से बारियातू निवासी वर्तमान भाजपा विधायक प्रकाश राम के चाचा रामदेव राम भाजपा के टिकट पर विधायक के रूप में निर्वाचित हुए थे. 1991 में हुए संसदीय चुनाव में भाजपा ने पलामू लोकसभा क्षेत्र से तत्कालिन लातेहार विधायक रामदेव राम को प्रत्याशी के रूप में उतारा था और वह विजयी होने में सफल हुए थे. ब्रजमोहन राम की संसदीय जीवन की शुरुआत 1991 में हुए बिहार विधानसभा अंतर्गत लातेहार विधानसभा क्षेत्र के लिए हुए उपचुनाव से हुई. जहां भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया. राम लहर में सवार भाजपा ने यह सीट आसानी से जीत ली. ब्रजमोहन राम पहली बार विधायक बने. 1995 में भाजपा ने उन्हें पुनः प्रत्याशी बनाया. परन्तु वह राजद के बलजीत राम से पराजित हो गए. 1996 में हुए संसदीय चुनाव में भाजपा ने तत्कालीन पलामू के सांसद रामदेव राम का टिकट काट कर बृजमोहन राम को सांसद का प्रत्याशी बनाया गया था. ब्रजमोहन राम ने पार्टी के भरोसे को कायम रखते हुए पलामू लोकसभा सीट पर विजय का पताखा लहराकर पार्टी के झोली में डाल दिया था. 1998 में हुए मध्यावधि चुनाव में पुनः बृजमोहन राम ने दूसरी बार सांसद बनकर भाजपा के भरोसे को कायम रखा. 1999 में फिर से हुए मध्यावधि चुनाव में बृजमोहन राम ने जीत की हैट्रिक लगाते हुए तीसरी बार सांसद बनने की उपलब्धि हासिल की. 2004 के लोकसभा चुनाव में राजद के मनोज भुइयां ने ब्रजमोहन राम के जीत के चौका लगाने के उम्मीदों पर पानी फेर दिया था. और उनके जीत के सिलसिले को रोका था. 2007 में रिश्वत कांड में मनोज भुईयां के सांसदी गंवाने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने बृजमोहन राम की जगह जवाहर पासवान को अपना प्रत्याशी बनाया था. वर्तमान में मनोज भुईयां भाजपा में हैं व जवाहर पासवान झामुमो के पिच पर राजनीतिक पारी खेल रहे हैं. 2009 में पलामू लोकसभा सीट गठबंधन के तहत जदयू को चला गया था. राजग से वर्तमान झारखंड सरकार में वित्त और संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर को राजग के तहत जदयू से प्रत्याशी बनाया गया था. भाजपा कैडर के दबाव में बृजमोहन राम निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पलामू लोकसभा क्षेत्र से चुनाव में भाग्य आजमाया. परन्तु उन्हें सफलता नहीं मिली. इस दौरान बृजमोहन राम 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य रहने के साथ संसद में कोयला, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण से संबंधित समितियों में उनकी बड़ी भागीदारी रही. 2014 में हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में एक नाटकीय घटनाक्रम में बृजमोहन राम को भाजपा ने नारायण भोगता का टिकट काटकर प्रत्याशी बनाया था. इसी दौरान बालूमाथ के मकईयाटांड में हुए एक भीषण सड़क दुर्घटना में वे बाल बाल बच गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंदवा में हुए चुनावी सभा में इसे विरोधियों की साजिश बताते हुए बुलेट का जवाब बैलेट से देने का आग्रह किया था. परन्तु झाविमो प्रत्याशी वर्तमान भाजपा विधायक प्रकाश राम से चुनाव में पराजित हो गए. तब से संगठन के लिए समर्पित होकर कार्य करते रहे. वर्तमान में अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश संयोजक का दायित्व का बखूबी निर्वहन कर रहे थे. पार्टी ने उन्हें पार्टी के प्रति समर्पण, निष्ठा और पार्टी की मजबूती के लिए उनके योगदान का इनाम के रूप में उड़ीसा जैसे महत्वपूर्ण राज्य का गवर्नर बना कर दिया है. निश्चय ही यह उम्मीद से कई गुना बढ़कर पार्टी ने उन्हें लौटाया है. चंदवा जैसे मामूली जगह से निकलकर किसी राज्य का राज्यपाल बनने का गौरव हाशिल करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि के साथ अपनी माटी को गौरवान्वित करना भी है. ओडिशा के राज्यपाल के रूप में उनकी नई भूमिका उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है.