पलामू किला रोड का बैरियर हटाने समेत पांच मांगों को लेकर ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
संयुक्त ग्राम सभा मंच ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को सौंपा मांग पत्र, 30 दिनों का अल्टीमेटम; कार्रवाई नहीं होने पर वन विभाग कार्यालय में तालाबंदी की चेतावनी
बरवाडीह (लातेहार)। पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) क्षेत्र में वन विभाग की पाबंदियों और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर संयुक्त ग्राम सभा मंच, बरवाडीह ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. मंच ने झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन प्रमुख को मांग पत्र सौंपकर पलामू किला रोड पर लगाए गए बैरियर को हटाने सहित पांच प्रमुख मांगों के समाधान की मांग की है. मंच ने विभाग को 30 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में सकारात्मक पहल नहीं होने पर ग्रामीण वन विभाग कार्यालय में तालाबंदी करने को बाध्य होंगे. मंच का कहना है कि पलामू किला रोड पर बैरियर लगाए जाने से स्थानीय ग्रामीणों और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों के अनुसार, पलामू किला जाने के लिए वन विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले वाहन के लिए 1,950 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं. ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब सड़क का निर्माण वन विभाग की एनओसी के बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा सरकारी राशि से कराया गया है, तो फिर आम लोगों की आवाजाही पर इस तरह की पाबंदी क्यों लगाई जा रही है. ग्रामीणों ने पलामू किला को राजा मेदिनीराय की ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और झारखंड की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है. ऐसे में इस धरोहर तक आम लोगों की पहुंच आसान होनी चाहिए.
फसल नुकसान का मुआवजा बढ़ाने की मांग
संयुक्त ग्राम सभा मंच ने जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा बढ़ाकर एक हजार रुपये प्रति डिसमिल करने की मांग की है. वहीं, जंगली जानवरों के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने पर प्रभावित परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है. मंच का कहना है कि वन क्षेत्र से सटे गांवों के लोग लगातार जंगली जानवरों के खतरे के बीच खेती-बाड़ी और दैनिक जीवन चलाने को मजबूर हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा और आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है. इसके साथ मंच ने जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों को टॉर्च, बैटरी, पटाखे और मिट्टी का तेल उपलब्ध कराने की मांग की है. इसके अलावा व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन भूमि पट्टा दिलाने की प्रक्रिया में वन विभाग से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की बात भी मांग पत्र में शामिल है.
ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं : कन्हाई सिंह
संयुक्त ग्राम सभा मंच के प्रतिनिधि सह जिला परिषद सदस्य कन्हाई सिंह ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना विभाग की जिम्मेदारी है. पलामू किला जैसे ऐतिहासिक स्थल तक आम लोगों की पहुंच, किसानों की फसलों की सुरक्षा और वन अधिकारों से जुड़े मामलों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मांगों पर निर्धारित समय सीमा के भीतर सकारात्मक पहल नहीं होने पर ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
समाजसेवी श्यामली शर्मा ने उठाई ग्रामीणों के हितों की आवाज
समाजसेवी श्यामली शर्मा ने कहा, वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. ग्रामीणों की आजीविका खेती पर निर्भर है, लेकिन जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान होने पर उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है. वहीं, ऐतिहासिक पलामू किला तक पहुंच को लेकर भी आम लोगों की परेशानियों का समाधान जरूरी है. वन विभाग को ग्रामीणों के हितों और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए जनहित में ठोस निर्णय लेना चाहिए.
ग्रामीणों की मांगों पर पहल करे विभाग : रूपाली देवी
भाजपा नेत्री रूपाली देवी ने कहा, ग्रामीणों की जायज समस्याओं का समाधान समय पर होना चाहिए. पलामू किला क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए वहां आने-जाने की व्यवस्था को लेकर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. जंगली जानवरों से फसल और जान-माल की सुरक्षा के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है. वन विभाग को ग्रामीणों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए, ताकि लोगों को आंदोलन के लिए मजबूर न होना पड़े.