झारखंड
नारी को अपनी शक्ति का बोध करना जरूरी: पुलिस अधीक्षक
331 कन्याओं ने लिया सामुहिक परायण पाठ में भाग

लातेहार। श्री रामचरितमानस नवाह्न पारायण के 53वें अधिवेशन का शुभारंभ रविवार को भक्तिमय वातावरण में किया गया. शहर के बीचोबीच स्थित अंबाााकोठी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उदघाटन महायज्ञ समिति के मुख्य संरक्षक सह राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम एवं पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया.
इससे पहले समिति के अशोक कुमार महलका ने अतिथियों का तिलक कर रक्षासूत बांध कर मंगलकामना की. मौके पर वैदिक मंत्रोच्चारण अनिल शास्त्री ने किया. इस अवसर पर मुख्य यजमान पवन कुमार महलका सपत्नीक मौजूद थे. अतिथियो को रामनामी दुप्पटा भेंट किया गया.
संबोधित करते हुए मुख्य संरक्षक सह राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने रामचरितमानस को उच्च कोटि का समाजशास्त्र बताया. उन्होने कहा कि इसके पात्र और और प्रसंग समाज में भाइचारा एवं कई दिशाओं में मार्गदर्शन देते हैं. रामायण के संदेशों को अपने जीवन में अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सकता है. रामचरित मानस हमें सीखाता है कि हमें समाज में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए. उन्होने कहा कि हमें रामचरित मानस के मर्म को समझना होगा.
बतौर मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने हमारे ग्रंथों में नारी को शक्ति का रूप माना गया है. नारी को अपनी शक्ति का बोध होना जरूरी है. उन्होेने नारी को शिक्षित होने की अपील की. कहा कि शिक्षा केवल स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन भी व्यक्ति को संस्कार और जीवन जीने की सही दिशा देता है. महायज्ञ समिति के अध्यक्ष प्रमोद प्रसाद सिह ने कहा कि लातेहार हमेशा से सांप्रदायिक सोहार्द की मिशाल पेश करता आया है. महायज्ञ परिसर के उस पार मस्जिद है, लेकिन इन 52 वर्षों में आज तक किसी प्रकार कोई वैमनस्यता नही हुई. अयोध्या से आये विषु प्रभाकर पांडेय ने कहा कि रामायण की एक-एक चौपाई महामंत्र के समान है. उन्होंने लोगों से सत्संग और कीर्तन से जुड़ने का आह्वान किया. पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि आज समाज में अशांति बढ़ रही है. और लोग मानसिक रूप से परेशान हैं. ऐसे में मानस का अध्ययन मनुष्य को शांति और सही दिशा प्रदान कर सकता है. गिरिडीह से आये अनिल जी भारद्वाज ने रामायण की कई प्रसंगों का उल्लेख किया. उन्होने कहा कि मनुष्य को राग व द्वेष से दूर रहना होगा. हमारे जीवन में मोह रूपी रावण मौजूद है. जानते हुए भी अज्ञान बने रहना ही मोह है. इसलिए रामचरितमानस के संदेशों को पढ़कर अपने जीवन में उतारने की जरूरत है. अशोक महलका ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हम भारत वर्ष में जन्म लिये हैं. उन्होने भारतीय संस्कृति और नारी शक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला. धन्यवाद ज्ञापन कोषाध्यक्ष विनोद कुमार महलका ने की. उन्होने कहा कि यह परिसर अब छोटा पड़ने लगा है. उन्होने श्रीराम मंदिर व महायज्ञ समिति के लिए अपना परिसर हेतु जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह नगर वासियों से किया.




